Thursday, September 2, 2010

पूतना




कृष्ण जन्मास्टमी दो दीन का हिन्दू पर्व है ,कृष्ण जन्म ,भाद्रपद कृष्ण पक्ष सप्तमी के अंत और अष्टमी के जन्म के साथ होता है , आईये जानते है ,कृष्ण के बल्यापन से जुड़े एक कहानी को ,पूतना एक महाभयंकर राक्षसी थी ,इसकी नज़र भर से हरे भरे पौधे सुख जाते और कुम्हला जाते थे ,यह किसी भी बच्चे को अपना पूत नहीं मानती थी ,इसके स्वयं के भी पुत्र नहीं थे,इसके अन्य बच्चो के नज़र भर से देख लेने से वो सुख जाते थे ,कंस की सभा में किसी ने कंस से कहा महाराज कृष्ण एक बच्चा है ,और बच्चो को नज़र भर से भस्म कर देने वाली राक्षसी त्रिपुड के जंगलो में रहती है ,
आप उशे हीरे मोती रत्न आदि सौप कर कृष्ण को मारने हेतु भेज सकते है ,
पूतना नन्द बाबा के गांव गोकुल वेश बदल कर पहुच जाती है ,घर में किसी को न देख कर घर में घुस कर वहा के आभूषण अपने कानो में लगाती है ,फिर वह कृष्ण की तरफ अन्दर ही अन्दर खौलती नजर से आक्रमद करती है ,कृष्ण खिलखिलाते रहते है ,पूतना आश्चर्य में उन्हें छु भी देती है ,तब भी कृष्ण के चेहरे की चमक बरकरार रहती है ,पूतना का मन परिवर्तित हो जाता है ,वह कृष्ण को अपना बच्चा बनाने हेतु लेकर भागने लगती है ,कृष्ण उसके मनोभाव को स्वीकार कर लेते है ,पूतना का मन नहीं भरता और वह कृष्ण को स्तन पान कराकर ही पुत्र स्वीकार करना चाहती थी , तब श्री कृष्ण उसकी लगातार गलतियों और इरादों को भाप कर उसका स्तन काट कर पूतना का विष निकाल देते है ,और उसे संतान प्राप्ति का वरदान देते है ,
शरीर से सारा विष -रक्त निकल जाने से पूतना मृत्यु को प्राप्त होती है ,........
लेखक और प्रेषक :-पूतन कावो से सावधान क्यों की तस्वीरे बनायीं जाती है ,और बोल नहीं सकती एम् .कॉम २०१० विद्यापीठ ,वाराणसी

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