Wednesday, November 3, 2010

सुरसा





सुरसा एक त्रेता युग की एक राक्षाशी थी ,इसकी मुलाकात हनुमान जी से ,समुद्र लांघते समय हुई थी ,जब वो लंका में माता सीता का पता लाने जा रहे थे ,इस राक्षाशी की कभी भूख शांत होती है , मुह बंद होता है ,और कभी इसकी ज्वाला शांत होती है ,.....


अतः समुद्र के ऊपर उडते एक टापू द्वीप पर यह राक्षशी हनुमान जी को घेर लेती है , विकराल मुह से थके हारे हनुमान जी को आगे नहीं बढ़ने देती है ,......हनुमान जी कहते है आप से मेरी क्या दुश्मनी है , तब सुरसा कहती है , मुझे श्राप है , कभी मेरी शादी हो सकती है ,और मेरे आस पास से कोई बच कर जा सकता है , अतः हनुमान जी उसके योग्य वर ढुधने का वचन देते है , और उससे बच कर जाने का उपाय पुछते है ,सुरसा नहीं मानती तो हनुमान जी उसके विकराल मुह से अपने ब्रम्हचारी होने की वजह से निकल जाते है ,चूँकि वह कद अनुसार दुसरो की उम्र खींच लेती थी ,इसलिए हनुमान जी छोटा रूप कर उसे पार कर कान से निकल जाते है ,और अपने गंतब्य को सकुशल चले जाते है ,


वही रामायण युद्ध में एक समय में लक्ष्मण जी को एक समय मेघनाथ की शक्ति बाण लगती है ,वे अचेत हो जाते ,मुर्छित भाई को देखकर राम विलाप करने लगते है ,तब फिर हनुमान जी अपने दुसरे सबसे कठिन कार्य के संजीवनी बूटी लाने हिमालय पर्वत जाते है , वह उन्हें राक्षश काल नेमी मिलता है ,हनुमान जी को अपना बचन याद आता है ,और उसे उसकी धूर्तता पर १० बार सोच कर मार देते है ,और उसको सुरसा के योग्य समझते है , वर देते है ,क्यों की वही सुरसा के योग्य वर था ,
और वही उन्हें सुरसा के उपुक्कत वर लगता है , वही सुरसा के गुण लायक वर लगा ,


संजीवनी को हिमालय सहित लाकर लक्षमण जी का प्राण ही नहीं बचाते वरन पुरे रामायण युद्ध में विजेता होने में श्री राम के परम सहायक होते है ,.....


माता जानकी की कृपा से सिद्धि और निधि को देने वाले हनुमान जी अमर है .....हनुमान जी उन लोगो में है ,


जिनके लिए मान्यता है ,की ये लोग धरती पर अमर है ......


कालांतर में सुरसा और कालनेमि की शादी हो जाती है ...मैंने कालनेमि पर लिखने से पहले २० वो बार सोचा पर अब लिखना पड़ा , क्यों की उसके जैसा धनी और चालाक धूर्त आज तक नहीं देखा ,काल नेमी रूप बदलने में माहिर ,कपटी ,ज़हर देने वाला ,जान से मार देने की नियत साथ रखता है ,|अपने साथी को धोखे से गन्दा जल और गन्दगी करने में इसे बहुत मज़ा आता है ,अपने भयंकर अपराध दुसरो के ऊपर डालने में इसको महारत हासिल है , इसके जैसा धूर्त ,चालाक , आज के युग में नहीं मिल सकते ,सुरसा बीच में रोककर मारती है ,और यह घात लगाकर ,बुलाकर मारता है ,waah रे काल नेमी और उसके ५० वो तरकीब ..ये मेरे घर आया कहा चलो इलाज़ करा दू ..मेरे ऊपर भरोसा नहीं ...मै साथ हो लिया मुझे बेहोसी का इंजेकसन देकर नंगा रोड पर फेक दिया था ,पागल घोषित कर पागल खाने ले गए ,कई बार अपनी तरफ से अन्य कोसिस ,जिसका प्रमांड नहीं hai , yek bar बड़ी चतुरता से मेरे लिए पानी में पूरा का पूरा सीसी जिसमे सानाईट था ,पूरी सीसी पानी में उड़ेल कर मेरे कार्यकर्त्ता और मेरा हितैसी बन कर ऑफर किया ....ये मेरे बिज़नस पार्टनर है , ......वाह रे आज तक इनसे धूर्त नहीं देखा ,


अब आप ही इनका कुछ करो .....मेरे समझ में तो ये माफ़ी योग्य है , मारने योग्य .....




लेखक ;-सुरसा -कालनेमि के चक्कर से घनचक्कर ......


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