Wednesday, November 3, 2010

त्रिजटा ( साभार )




बात त्रेता युग की है ,सुपर्न्खा की कपट और रावण के उन्म्मद से सीता जी का हरण हो जाता है ,रावण सीता जी को अशोक वाटिका में रखता है ,तथा अपने सबसे खतरनाक ,कुटिल ,अनुभवी ,और जोड़ तोड़ में माहिर राक्षशी त्रिजटा को सीता को अपने पक्ष में मोड़ने को नियुक्त करता है ,सीता , त्रिजटा को अपने से बड़ी होने के कारण माता का दर्जा देती है ,त्रिजटा एक महाभयंकर अग्नि से जलती कुटिल ,लोमड़ी राक्षाशी थी ,वह रावणका काम होने से मन ही मन जलती रहती लेकिन सीता जी के बचन से अपने को ज़ाहिर नहीं होने देती ,उसकी जटा में तीन निशान था ,त्रिया चरित्र में माहिर थी , इसलिए त्रिज़ता नाम पड़ा ,कच्चा मांस चखना ,रावण के काम होने से अन्दर ही अन्दर खून की प्यासी थी ,खून पीना इसका शौक था ,तथा जिव के घाव पर नमक छिड़क कर देखना इसका शौक अपने पति को इसके लिए कहना ,


युद्ध समाप्त होता है ,रावण मारा जाता है ,...और मर्यादा पुरसोत्तम श्री राम विजयी होते है .....उस युग में निंदा भी एक महापाप माना जाता था ,सो श्री राम त्रिजटा जैसी राक्षाशी के संपर्क में रही सीता जी के साथ रहने पर कोई प्रभाव हो और सीता जी के ऊपर कोई राक्षाशी परिवर्तन तो नहीं गया है ....का मन ही मन मनन करते है ....और अग्नि परीक्षा चयन होता है सीता जी श्री राम के मन की बात जान गयी .......


और अपने शब्द पर माता जी का दर्ज़ा देना पर कायम रही ...........


और फिर अग्नि परीक्षा में अग्नि से सकुशल बाहर जाती है ....परन्तु त्रिजटा के प्रति सीता जी सम्मान कायम रहा .....श्री राम त्रिजटा के आंतरिक राक्षाशी पाप को जान गए थे ,...सीता जी कहा तुम्हारे मन का सम्मान अभी भी धुला नहीं वो एक अधम -राक्षाशी है ,वो कही से भी सम्मान के लायक नहीं है ,धीरे -धीरे समय बीतता गया ,परन्तु पति की बात मान कर वो अपने पूर्व के सम्मान पर कायम रही ,इसी दौरान श्री राम एक श्रेष्ट प्रजापालक साबित होते रहे ....लोग आज भी राम राज़ की उपमा देते है ,....इसी दौरान एक राम भक्त धोबी श्री राम की आतंरिक मनोभाव को समझ गया था ,तथा उसकी पत्नी ,उसकी आज्ञा लेकर घर से बाहर चली गयी ,जिस पर उसने अपनी पत्नी से कहा की "मै श्री राम नहीं हु ,मै श्री राम की तरह महान नहीं हु जो बार बार मेरी बात मानकर मेरी आज्ञा को अनदेखी करती हो ...जा मैंने तेरा परित्याग किया " चूँकि श्री राम अपने भक्त तथा अपने राज्य के नागरिक का सुझाव और लाज रखने हेतु तथा अपने राज्य के नागरिक के प्रति अपना प्रजा पालक का कर्तब्य समझ कर सीता जी को भाई लक्षमण का दर्सन करा कर सीता जी का त्याग कर भाई लक्ष्मण द्वारा बन को भेज देते है ,........कहानी यही समाप्त नहीं होती ये त्रिजटा जैसी राक्ष्शी अपने वंश को आगे बढाती है ,गन्दी विडाल उत्पन्न करती है जो मुह से गन्दगी करती रहती है ,ये विडाल मेरे पास आई और त्रिफला चूर्ण मांगी फिर यहाँ वहा कहती फिरती है ,की मैंने उसके मुह में डाला आदि -आदि


श्री राम के लिए ...


राम हो या रहीम हो ....भक्तो के महिम हो ,,,


राम ने भक्त की लाज रखा ....एक गरीब के सर भी ताज रखा ....||




कालांतर में त्रिजटा और अहिरावन की शादी हो जाती है ,और त्रिजटा के कहने पर ....अपने पिता को ज़हर देकर मार डालता है ...यह कर्म से कही बढ़कर अपने ही संतान से दुष्कर्म और अपने परिवार जन का ही भक्षण करना जिंदा काटना ,जिंदा ज़लाना इसका खेल है मानव मांस भी खाने को आतुर था ,चोरी भी ऐसी की जिसकी लाठी उसकी भैस ...ये रावण का मित्र है .....विश्व का पहला आदमी है ,जो रावण से भी बड़ा ज़हरीला है ....ये पाताल में रहता है ,यानि बिलकुल बिसुद्ध रॉकचश क्यों की यह बच्चो तक को अपना लिंग -वीर्य पिला देता है , मार कर बालात्कार करना और बलात्कार कर के मारना इसकी आदत है .....ये अपना राज़ खुलने पर पागल हो जाता है .....आज कल क्वींस कालेज में पढ़ा रहे है ,कौन सा पाठ अनुसरण का .....


ये आज के रावण राणा सिंह और उसके दाहिने हाथ डब्लू से भी बुरा है ....ये लोग गन्दी फिल्म बना कर भी बाहर बेचे है ....मेरे दुश्मन मुझे मारने का कारण नहीं बता पाए ये लोग कड़ी दर कड़ी कार्य करते है ...om प्रकाश सिंह ,विनोद सिंह ,राहुल सिंह , विपुल राय और नाम नहीं पता ...पियूष तिवारी ..वकील यादव आदि


श्री नाथ यादव .अशोक यादव ये लोग छेड़खानी की सारी हदे पार कर चुके है .....


रवि गुप्ता , रजनीश गुप्ता ....ये लोग घर बुला कर पूजा है , जब गया तो चरणामृत के रूप में सेमन और ज़हर दे दिया क्यों वही बता सकते है ......और रजनीश गुप्ता ये लोग मेरे घर के बारे में झूठी गन्दी -गन्दी बात का प्रचार जाते अंत में यही यही की ....सवाल कीसामूहिक हो जाता ,है जब की ब्याक्तिगत रहता है मुझे लगा दिया है , क्यों की सरीर सुन्न हो जाता है ,,,.........


मुझे कई बार ज़हर भी दिया दिया गया है ....कई बार मरते बचा .....सब मेरे मरने को पचता रहे है .....अन्य कई २६ साल में २६ दुश्मन होस्टल में था तभी से .......कुछ लोगो के भाई भी कम खतरनाक नहीं है .... anth me yahi
sawaal ki पुण्य samuhik ho jaata hai ,jab ki पाप byaktigat rahta hai ..



लेखक ;-त्रिजटा के तरकीब से वाकिफ ....एम् .कॉम २०१० .....