Wednesday, November 3, 2010

आज का अहिरावण (सच्ची कहानी )




त्रेतायुग में रावण ने कहा था ,अहिरावण तो मुझसे भी बुरा है ,तो पहले मेरी मृत्यु नहीं हो सकती ,अहिरावण पातालमें रहता था , बिलकुल बिसुद्ध राक्ष ,

जानते है , आज के अहिरावण की सच्ची कहानी ....पहले का अहिरावन तो छल से राम -लखन को हर ले जाता हैपर आज का अहिरावण छल से अपने भाई की ११ साल की बेटी को गाँव ले जाता है ,पहले दिन तो सब ठीक रहता है , सरे दिन अपने साल के बेटे को भाईया बोलने को कहता है ,घर में मिली उपेक्षा से लड़की बाहार जाती है ,तो मार कर अन्दर ले आता है ,४थे दिन अपनी पूजा करने को कहता है ,और पूजा करने पर फिर मारता है ,लड़की बोलने की कसम देती है ,तो वह अहिरावण कहता है ,ठीक है अब सिर्फ मारुगा बोलूगा नहीं ,और फिर मारता है ,और पांचवे दिन उसकी पत्नी और वो अहिरावन बुला कर छत पर रात को लड़की को अपना लिंग पिने को कहता है ,और अपने जोर से वीर्य भी पिला देता है , लड़की रोस दिखाती है ,तो पुरे उन्माद से मंजिले छत से उल्टा सर के बल बस फेकने ही वाला था , लड़की के गिडगिड़ाने से छोड़ देता है ,

५वे दिन उस अहिरावन को गाव वालो की नज़र गयी ,तो कहता है ,ये लड़की गलत है , मेरा मुह नोच ली है ,और अन्दर लाकर फिर मारता है ,और लड़की से बोलता है ,बचना है ,तो गाव में घूम कर बोल की तेरा पापा और भाई गंदे आदमी है ,और गन्दा काम करते है ,

लड़की खाना पीना छोड़ देती है , वह हैण्ड पम्प से पानी पीती है ,तो वह अहिरावण उसे १८-19 सेकंड तक पानी के बाल्टी में पानी में मुंडी पकड़ कर बोर देता है ,लड़की अपना सर बाल्टी के दोनों ओर जोर जोर से लगाती है तो छोड़ देता है ,

६वे दिन लड़की अपने घर से भाग जाती है किसी गाव वाले के यहाँ सरन लेती है ,वह अपनी आप बीती बताती है तो ,वह अहिरावण फिर उसे पकड़ लाता है ,और फिर मारता है ,कहता है ,इस बार कान ले रहा हु ,अगली बार जीभ काट कर फेक दुगा , लड़की फिर घर से बाहार जाती है ,तो फिर पकड़ लाता है , इस बार मारता नहीं और सारा कपडा जला देता है ,नंगा ,घर में नंगा रखता है .........

7 वे दिन लड़की मानसिक संतुलन खो देती है , तोह वह अहिरावण उसे १६ फीट राड़ पर उल्टा टांग देता है ,कहता है तेरे लिए चौकी लगा देता हु , मरोगी नहीं ,लड़की सर के बल धाड़ से गिर जाती है ,

अब लड़की दर के मारे बाहर नहीं निकलती है , तो वह अहिरावन अपने परिवार के सामने लड़की के पैरो के बीच पुरे जोर से मार ता है लड़की उचल कर निचे गिर जाती है , बेहोश हो जाती है , फिर वह अहिरावण बोलता है ,अपने माँ से गलती भी कर रही है और बार बार बेहोश हो जा रही है ............वह कई दफा पानी छिड़क कर मारता है ....

वे दिन वो उस लड़की को ड्रम में बंद कर धुप में रख देता है ,

९वे दिन फिर मारता है कान से खून ...और राजदूत से पेट्रोल निकाल कर रूम में बंद कर जिंदा ज़लाने ही वाला था ,और अपने खिड़की से नज़ारा देखता ...और अपने पत्नी से कहता है ,ऐसन मौत कोई देखले होई ......

घर के बूढ़े बाबा ,दादी बचा लेते है .......

वे दिन लड़की को फिर मारता है , और उसकी बीवी उसे प्रेम से खाने को कहती है और गन्दगी खिला देती है ,

लड़की फिर बाहर भाग जाती है ,लड़की को अहिरावण फिर पकड़ कर लता है , और बोलता है ,अब खेल ख़तम और काटने के पुरे उद्देस्याय से टोइलेट में ले जाता है ,गाव के एक दो लोग आगे पीछे लग जाते है ,वह लड़की को लेजाकर कमोड में मुह दाल देता है , और सर को लात से दबा कर रखता है ,लड़की मुह से खून जाता है , और कर अपनी बीवी से बोलता है ,घबरा नहीं वो बचेगी नहीं ...........मैंने भी गन्दीगी खिला दी या

लड़की को घर के बाबा -दादी किसी तरह ला ते है ,उसे बेद पर लिटा देते है ,लड़की का सारा सरीर ठंडा हो जाता है ,उसका छोटा भाई जो अब तक सारे क्रम का मज़ा ले रहा था ,अपनी डोकट्री झाड़ता है ,कहता है ,पैर रगड़िये नहीं तो ये गयी .....इस पर वह अहि रावण उसका कान पकड़ कर उमेठने लगता है ,.....

लड़की २४ घंटे कोमा में रहती है ........किसी तरह फिर होस में आती है ........

ताने उलाहनो की वजह से वह इन दिनों खाना नहीं खाती है .....तो एक दिन वह अहिरावण और उसकी पत्नी उस लड़की को एक कमरे में ले जाते है ....तो उस अहिरावन की माँ बोलती है ...अब तुम लोग जो मन करो .अब मेरी कोई औकात नहीं है .....और फिर अहिरावन और उसकी पत्नी एक रूम में लेजाकर एक हाथ की पतली हरी अशोक की टहनी से पीछे से इंडोस्कोपी करते है .....अन्य बाते बहुत गन्दगी की वजह से नहीं लिख सकता .....

उसका अहिरावण का विचार उस लड़की को काट कर भूदे बाबा और स्वयं मांस भक्सन का इरादा था ....कह रहा था बात नहीं मानती

पर गाव वालो की नज़र से वह अहिरावण उसे काट नहीं पाया ....और इस बिच प्लान बनता है , काट कर बोरे में फेकने का और टुकड़े टुकड़े कर ..बहा देना .....

लड़की पर खतरा देख उसकी दादी उसे सबसे छोटे भाई के घर किलो मिट दूर भेज देती है ....

वह अहिरावण फिर बार वहा जाता है ,जान से मारने के उद्देश्य से गला दबाने जाता है , पर छोटा भाई कहता भैया को क्यों मुह दिखा गा और उस लड़की को बचा लेता है ........लड़की घर जाती है , एकाएक बीमार मरने के कगार पर aapaat काल में भर्ती किसी तरह मौत से बच कर जिंदा लड़की घर कुछ नहीं बताती .....

उसके बाबा जब लड़की के घर आते है तो वह अहिरावन चुपके से आकर अपने बाप को राज़ खुले के डर से हलाहल बिष देकर मार देता है .,और अपने गाव भाग जाता है ......और चुपके से लड़की से कहता है ,बोली तो कोई ना बची .......इस बिच गाव से आने वाले चावल आदि में वह सल्फाश की १०० गोलिया दाल कर भेजता रहा ....जिसे खाने से स्कूल में उलटी और बेहोसी ,और अन्य समस्या आती रही ...


वह लड़की पर उसकी बड़ी बहन को सक हो जाता है ...वह गाव जाती है ,तो उसका हाथ तोड़ कर रेप कर देता है ,....

और बोलता है ,जा प्रेग्नेंट हो इसलिए मार नहीं रहा हु ....तेरा भाई जो तुजसे नहीं बोलता उसने ही कहा था ......लड़की कुवे में जान देने जाती है ...पर किसी तरह बच जाती है .......क्या आप उस अहिरावन को जानना चाहते है , वो है ...नन्दलाल यादव आज कल क्वींस कालेज (वाराणसी )में पढ़ा रहा है .....और उसका साथ और मार्गदर्सन करने वाला सरा भाई है सुरेन्द्र यादव (जो मिलेट्री में दवा बाटता है ) आश्चर्य की बात की उनका बड़ा भाई जिसने उन्हें पढ़ाया ...नौकरी दिलवाई वह आज भी नपुंसक बना बैठा है ...........इन दोनों को बुरी से बुरी मौत भी कम है ....मुह में पैसा ठूंस -खिला कर मारा जाये और १० मौत भी कम है .....मै रहूगा या वो


मैंने बार कोसिस की अहिरावन को .....पर .....कोई साथ नहीं आता ....उलटे पोली ने मुझे मारा और बस एन्कोउन्टर करने ही वाली थी ......सब दोस्त भाग चुके है .......मेरा भी जीवन रिस्क में है .......कोई है ....भाई ........जो साथ देगा ........


लेखक ;- समझ में नहीं रहा क्या लिखू साला




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