Thursday, November 18, 2010

माया देवी























एक बार अहिरावण की बेटी चंडालिका एक ११ वर्षीय कन्या की बलि मांगती है ,अहिरावण अपना भेष बदल कर चंडालिका की इच्छा पूरी करने के लिए इधर -उधर अन्य जगह कन्या खोजता फिरता है ,उसे एक जगह जंगल में एक अदभुत कन्या मिल जाती है ,अहिरावण विनती ,छल और अच्छे होने का नाटक कर उन्हें अपने यहाँ अतिथि होने का आग्रह करता है ,मायादेवी उसके घर जाती है ,घर में उन्हें कुछ खटकता है ,अपने दिब्य दृष्टि से देखती तो ज्ञात पड़ता है, ये सारे तो दानव है ,शैतान है ,इसी दौरान घर में रखे दूध में हलाहल विष मिला दिया जाता है ,की ये लड़की दूध पिए गी और मर जाएगी ,कुछ खा भी नहीं रही है , इसी दौरान दूध उस अद्भुत माया देवी के हाथ न लगे अहिरावन की चंडालिका देवी उस दूध को फट से पी जाती है ,और अपने डायन माँ को जब बताती है ,और जब उसकी माँ यह जानती है ,तो अहिरावण और डायन त्रिजटा क्रोध से पागल होकर हाहाकार करते हुए ,मायादेवी को मारने जाते है ,उसे लगता है ,अनेक मानवो के भक्षण से उत्पन्न उसकी बेटी चंडालिका देवी का मज़ाक बन गया , वह मायादेवी को उसी घर में जला कर खाना चाहता है ,और उसी ऊपर से फेकना चाहता है पर भेद खुलने के डर से खून के घुट पि कर रह जाता है ,
फिर जो हाल अहिरावण और त्रिजटा की बेटी करती है ,वो देखने लायक था , फिटकरी से वे चंडालिका की उल्ल्टी कराते है ,अन्य घटना और दर्द से बचते हुए माया देवी अपने माया से घर से बाहर निकल जाती है ,..................!!!!!!
लेखक ;- बिंदास सतर्क .......वाराणसी .......





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