Tuesday, November 22, 2011

आयुर्वेद -एक जीवन स्वाद



आयुर्वेद एक विशुद्ध प्राचीन भारतीय चिकित्सा पद्धति है ,| आयुर्वेद का अर्थ है , जीवन का ज्ञान या विज्ञानं , यह चार वेदों में अथर्वेद का अंग है , इसमें अथर्वेद में चिकित्सा के साथ जादू टोना के विषय में भी ज्ञान आदि बताया गया है , इसके चिकत्सा के जनक, भगवान् धनवंतरी है ,| जो समुद्र मंथन में , विष , एरावत हाथी , लक्ष्मी , कामधेनु गाय, ५) कल्प वृक्ष ६) मदिरा ७) रम्भा ८) उच्च्स्रेवा घोडा ९) कौस्तुभ मणि १०) धनुष ११) शंख १२) चंद्रमा के बाद अंत में देव धनवंतरी हाथ में अमृत कलश लेकर उत्पन्न हुए , |

इनमे अधिकतर रत्न देव लोगो ने स्वीकार कर लिया , लक्ष्मी स्वयं विष्णु के अधीन हो गयी , दानव लोगो को इन रत्नों से कोई सरोकार नहीं था ,क्यों की इन रत्नों के साथ दायित्व और त्याग भी जुड़ा था | दानवो को केवल अमृत की लालसा थी , जिसके लिए सागर मंथन हो रहा था , जिसमे मंदराचल पर्वत मथानी और भगवान शेषनाग रस्सी बने थे , बाद में बढ़ते श्रम से मंदराचल पर्वत डूबने लगा तो ,विष्णु भगवान ने कछप अवतार से उसकी रक्षा की , |

आते है , आयुर्वेद पर जो पूर्णतः प्रकृति पहचान व प्रकृति प्रेम को दर्शाती है ,| इसमें हमारे आस -पास खान -पान मुहलगी वनस्पतिया है , जो अपना तासीर(प्रभाव ) रखती है ,तथा रोगी के वात ,पित्त , कफ, के मापन से और हमारे शरीर में पांच तत्व है ,और रोग भी इन्ही पांच तत्व से सम्बंधित होता है , ५ तत्व है , वायु , जल , पृथ्वी (शरीर) अग्नि और आकाश (मस्तिस्क सोच )


सांप की प्रकृति डसना है , तो दुर रहो और सपेरा हो तो ,पास रहो , हमारे हिन्दू धर्म में कथावो में धनवंतरी व अश्विनी बन्धु जो देवतावो के डॉक्टर है , को चिकित्सा देवता कहते है ,|

मेरे समझ में आयुर्वेद का यह भी शाब्दिक अर्थ हो सकता है , वह वेद जो आरोग्यता प्रदान करता हो , आयुर्वेद चिकित्सा की सबसे प्राचीन पद्धति है , | आयुर्वेद अब प्रकृति , दादी माँ के आँचल से निकल कर अब डाक्टरों के पर्चो पर आ गया है , | पर क्या आयुर्वेदिक दवा की सुइया है ,? शायद नहीं पर आप आयुर्वेद के मुरीद है तो शायद यह नौबत न आये ,| क्यों की रोग न पालना ही समझदारी है , | prevention is better then cure ... (एक सुरक्षा लाख नियामत )





यहाँ यह भी बताना चाहुगा कि पतंजलि और अरविन्द घोष क़ी विरासत को बाबा रामदेव ने संभाला व नवजीवन दिया ,




विदेसी उत्पाद पर उनका प्रहार अति प्रशंसनीय है , उनकी आक्रामकता ही उनकी दुश्मन है , पर उनको अभी सीखना होगा , क्यों क़ी वे केवल योगाचार्य है ,और ब्रह्मचारी भी , | लोगो का प्यार ही प्रशंसा है ,|


यहाँ बताना चाहुगा , योग प्रकृति के प्राणियों द्वारा जैसे जानवरों द्वारा विकारो को दूर करने वाली गतिविधियों से जन्मा है , और नाम भी उन्ही अनुसार रखा गया है , जैसे मत्स्य आसन , स्वान आसन , भुजंग आसन, मंडुक आसन , आदि -आदि |कौन सा आसन किस रोग में होगा यह भी ध्यान जरुरी है ,|






आयुर्वेद में शल्य चिकित्सा के जनक महर्सी सुस्स्रुत है , और मह्रसी चरक क़ी चरक संहिता है , |




यही आयुर्वेद च्यवन ऋषि के आँखों क़ी रोशनी व जवानी वापस ला देता है (बाद में इसी से आयुर्वेद में चय्वंप्राश आज भी आते है ), तो वही योग ,शरीर में छिपी शक्तियों को देवतावो से भी आगे ले जा सकता है , | जिसे कुण्डलिनी जागृत करना कहते है ,|


आयुर्वेद में सबसे बड़ी खासियत यह होती है , कि यह आपके प्रकृति को नहीं बदलती बल्कि स्वयं आपके प्रकृति की बन जाती है , यानी लड़ाई नहीं केवल प्यार ,|


आयुर्वेद में घर के अदरक , लहसुन, हिंग, हल्दी, अजवायन ,से लेकर बाहर का नारियल तक सामिल है , | पक्षियों के आश्रय दाता पीपल के फल में भी औषधि है , तुलसी,नीम, इमली, आवला, मिर्च,मशरूम,करेला, आम,,जामुन,देसी बबूल,गुड, चन्दन, गुलाब, हरी घास , शीतल जल, तथा ओस की बुँदे ,तक सभी में आयुर्वेद पाया जाता है,| यहाँ तक की जोख से भी आयुर्वेदिक चिकित्सा होती है , जो जमे गंदे खून को खीच लेती है,यह चिकित्सा के देव धनवंतरी के सभी हाथो में से एक हाथ में रखे दिखती है ,|

देवतावो को अर्पित वनस्पतियों में भी कुछ न कुछ है , चाहे वह धतुरा ही क्यों न हो , यहाँ मेरे पास एक सामाजिक कथा है , सेक्स के चक्कर में दो लोग ने दवा लिया एक को कोढ़ हो गया , तथा दुसरे को ज़हर बन गया , दोनों लोग ढलती उम्र 55 के थे ,|


मेरे सोच से अर्क श्रेस्ठ औषिधि होती है , शहद भी तो पेंड -पौधों के फूल से एकत्र किया जाता है , जो अपनी श्रेस्ठ्ता का दावा विश्व भर में करता है , |( आप किसी डॉक्टर के पास बहुत गंभीर हालत में ले जाय तो वो उसे तुरंत पानी की ड्रिप लगा देता है ,|ताकि जीवन की रक्षा हो )


आवश्यकता अति होगी तो अमृत अर्क भी नर्क बन जायेगा , |


अदरक ,हल्दी, लहसुन, का मेरे अनुसार प्रयोग ,एक सेव रोज खावो डॉक्टर को दुर भगावो, से बेहतर है ,इसका उदहारण घर -घर में इसका प्रयोग और यह यह सेव से महंगा भी नहीं है , |जो साबित करता है भारतीय खान-पान जलवायु अनुसार श्रेस्ठ है , |

मुख्य आयुर्वेद वनस्पतियों के पत्तो, फूल, फल, जड़,तना, में ही निहित है ,परन्तु एक रात रानी का पौधा है , जिसके पास से हटने को जी न करे , दूसरा ज्योत्रफा (रतनजोत) जो दुनिया से ही हटा देता है ,|

यहाँ मै पौधों की महिमा नहीं गा रहा हु , मै यह भी बताना चाहुगा की अफ्रीका में कुछ पौधे मासाहारी भी होते है , जो कीट पतंगों को चालबाजी से खाते है , |


खमीर खाना , पाना, -गवाना है , ये चाहत परेशानी भी है , | अतः स्वाद सीमित और नियंत्रित हो ,सांप को मारने के लिए वैसा होना या सांप चाहिए जहर -जहर को काटता है , यह क्षण भयानक होते है ,|



यूनानियो ने हमारी विरासत को संभाले हुए है , आयुर्वेद और यूनानी चिकित्सा को मिला कर कुछ नया प्रयोग और हासिल किया जा सकता है, |परन्तु जीवन से जीवन की चिकित्सा हितकर नहीं है , | आयुर्वेद में वनस्पतियों , प्रकृति पहचान , व दिशा निर्देश सर्वोत्तम है , | सजग जनता , सजग समाज, सजग देश यहाँ आप fantastic four की शक्तियों से भी सीख सकते है ,|




जैसे परिस्थिति अनुसार ढलना, बनना , सामंजस्य ,अग्नि उर्जा पर सामयिक नियंत्रण और प्रयोग , मन पर नियंत्रण दुर्व्यसन से दुरी , और शरिर को मजबूत रखने पर जोर , हिन्दू नीव अनुसार धर्म , अर्थ, काम, मोक्ष, है |,| और इन सबसे बड़ी बात इनको अच्छाई के प्रति प्रयोग वरना इनकी शक्तियो की कोई अहमियत नहीं |

जाते जाते एक बार हमारे आस-पास की प्रकृति ही आयुर्वेद है , चाहे वह जल हो रंग हो ,तलाब का कीचड़ हो , कीचड़ का सीप हो या सीप का मोती हो , रुद्राक्ष की माला भी हो सकती है , (जो ह्रदय सम्बन्धी रोग कम करता है, जैसे उच्च रक्तचाप आदि )एक मुखी रुद्राक्ष को सर्व श्रेस्ठ मन जाता है ,रुद्राक्ष पर खोज-प्रयोग की जा सकती है , मान्यता है , रुद्राक्ष शिव जी के आंसू से उत्पन्न एक वृक्ष का फल बीज होता है , इसके पीछे भी एक कथा है , एक बार शिव जी तपस्या कर रहे थे , उसी समय एक दैत्य ने आकर उनपर आक्रमण किया , क्रोध से उन्होंने आँखे खोली उनकी आँखों से कुछ आंसू की बुँदे गीरी , जहा जहा वह बुँदे गीरी वहा -वहा रुद्राक्ष के वृक्ष उत्पन्न हुए , शिव जी ने क्रोध में उस दानव को तीसरी नेत्र की ज्वाला से भस्म कर दिया ,|



हवा हो या केरल का शांति आश्रम , दिमाग और शरिर के लिए शांति आश्रम की आवस्यकता हो सकती है, |

अधिकतर रोग पेट से उत्पन्न होते है ,| आज के समय को इनकी आवस्यकता के समय को पहचानना समय-समय पर पालन करना जैसे सुबह की प्राण वायु लेना , क्यों की सुबह ६ बजे तो घडी की सुईया भी उठ कर खड़ी हो जाती है , अतः ६ बजे हर हाल में बेड छोड़ दे , प्राण वायु से उम्र बढती है ,|







आयुर्वेद में मैंने अपना एक सूत्र दिया रखा है , जो सौ साल की ओर ले जाता है , जो है ....|

आहार शुद्धता (प्राथमिकता )+ स्वक्षता (चयन )- स्वाद (नियंत्रण) = स्वस्थ्य शरिर (सौ साल जीवन )


सूत्र पर विशेष ध्यान देना आवश्यक है , जैसे नशा त्याग, आहार सेवन जैसे जाड़े में सर्दी में दही न खाए ,ठंडी चीजो से बच कर , संभव हो तो एक लिस्ट बनाये की कब उठना है , कब सोना है, कब खाना है ,कब पीना है , कब किस दिन क्या आहार बनेगा , आदि -आदि ,| बुढ़ापे में जाड़े में गर्म दूध में चुटकी भर हल्दी ले ,|

इसके पालन से सौ साल उम्र जिया जा सकता है , जिसका आयुर्वेद में जिक्र है , की मनुष्य की वास्तविक उम्र सौ साल होती है , इससे पहले की मृत्यु आहार -विहार ,रहन-सहन, खान-पान आदि की त्रुटियों से होती है , |

योग करो , कर्म करो , पसीना निकालो , प्रकृति चयन प्रथम हो , व आधुनिक भोजन कम हो , आप सौ साल जिन्दा रहेगे ,और इसके पालन से आपका बच्चा भी पढने में तेज़ होगा , खुश रहे खुश रहने से उम्र (ज़िन्दगी)बढती है ,और रोग घटते है , | अंत में यही की स्वास्थ्य के प्रति लापरवाह रहेगे तो पछताएगे अतः दर्द झेलने से अच्छा है सजग रहे ,अतः स्वास्थ्य के प्रति जागरूक रहे , जिससे तन और मन दोनों स्वस्थ्य और सर्वोत्तम होगे , | मै यहाँ सौ साल के जीवन की गारंटी नहीं ले सकता क्यों की वो आप पर और आपके जीवन स्तर पर निर्भर करता है ,|


जाते -जाते .......सर्वे भवन्तु सुखिन : सर्वे सन्तु निरामया, सर्वे भद्राणि पश्यन्तु माँ कश्चित् दुखभाग भवेत् .....||


यदि आप आयुर्वेद के डॉक्टर खोज रहे है , तो b .h .u . के अजय पाण्डेय(काय चिकित्सा ) , आदि अन्य को दिखा सकते है , |


जाते -जाते यही की चिकित्सक कभी पैसे के लिए कार्य न करे , पैसे को ईमान न बनाये , | आशा और ज़िन्दगी दोनों एक दुसरे के पूरक है ,|also click on;-http://hi.wikipedia.org/wiki/%E0%A4%A7%E0%A4%A8%E0%A4%A4%E0%A5%87%E0%A4%B0%E0%A4%B8

लेखक ;- आप के स्वास्थ्य के लिए ......रविकान्त यादव

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