मंगलवार, 25 जनवरी 2011
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मंगलवार, 11 जनवरी 2011
गौतम बुद्ध -दर्द और शांति-1










सहयोग ही गौतम बुद्ध को भगवान बना दिया ,
उन्होंने पहले दुःख -दर्द का अनुभव किया तथा परमात्मा से दुसरो के कस्टो को दुःख को दूर करने के लिए ज्ञान को प्राप्त किया ,हमारे स्वयं के बस में कुछ नहीं होता ,क्यों की हम स्वयं अपने अस्तित्वो को सच्चे अर्थो में नहीं जान पाते है ,अतः तप से ही जीवन का वास्तविक अर्थ समझा जा सकता है , ज्ञान प्राप्ति ही सब कुछ नहीं होती ,या सब कुछ नहीं है ,ज्ञान का सामयिक ,सामाजिक हित ,प्रयोग ,और मन में गजब की शीतलता देवतुल्य भगवान गौतम बुद्ध बना सकती है ,तभी शांति मिलेगी ,
सत्य और शांति ;- अर्थात ज्ञान और राहत के प्रकाश को कोई डिगा नहीं सकता ,सूर्य प्रभावित करता है ,प्रभावित नहीं होता ,उसे कुछ देर का ग्रहण लग सकता है ,बादल भी आँख मिचोली खेल सकते है ,पर वह ज्यो का त्यों रहता है ,जीवन के लिए ,
अपना दीपक स्वयं बनो इसकी रोशनी सदा साथ रहेगी ,इस ज्ञान, शांति के पश्चात सारे दुखो चाहतो का अंत संभव है , एक बौद्ध भिक्षुक का मुड़ा बालो रहित सर मानो गवाही देता है ,इस ज्ञान -शांति पश्चात अन्य ज्ञान -शांति की ज़रूरत नहीं ,अहंकार का संपूर्ण परित्याग ,मिथ्या ,छलयुक्त ,आनंद सहित ,खुशियों -छलावो से दूरी हो ,
दीपक ही उजाला रोशनी प्रदान करता है ,जब अन्दर से आभा की किरण जागृत हो गयी तो फिर बाहर का स्वांग कोई मायने नहीं रखता ,वह एक ढोंग ,बनावटी लगने लगेगा ,अँधेरे को उजाले से दूर किया जा सकता है ,पर उजाले को अँधेरा करना सोचना नहीं पड़ेगा ,ये स्वतः विराजमान है ,हमारे अन्दर भी ,
प्रशन यही है , कि जो बिराजमान है ,मेरा मूल प्रकृति है ,उसके बन्धनों से मुक्त कैसे हुआ जाय ,क्यों कि या हमें छोड़ना नहीं चाहती और हम इसके बिना रह नहीं सकते ,
अपने ज्ञान -प्रकाश -तप से ही अपने सारे काम ,क्रोध ,मद ,मोह ,लोभ ,इर्ष्या ,को दूर किया जा सकता है ,तप हमें पवित्र करता है ,और ज्ञान हमें राह दिखाता है ,
एक दीपक एक बाती और तेल सब कुछ तो है ,हमारे पास ,पर उस दीपक में केवल प्रकाश कि कमी है ,
हमारा शरीर दीपक ,हमारी इन्द्रिया बाती , और हमारी आत्मा दीपक का तेल है ,और प्रकाश ज्ञान है ,
दीपक कि बाती जलती रहे ,और आत्मा रुपी तेल ख़त्म न हो ,
ज्ञान का प्रकाश चारो तरफ राहत प्रदान करे ,ये इन्द्रिया विकार हमें हमारी आत्मा को खोखला बना देती है ,चरम ज्ञान की प्राप्ति पश्चात आत्मा ज्ञान रुपी तेल का क्षय नहीं होगा ,और प्रकाश ज्ञान -तप -शांति के प्रभाव से सतत प्रस्फुटित होता रहेगा ....जाते जाते राजा ,राजकुमार ,वही है ,जो सत्य राह पर चलते हुए मदद करता रहता है ,
भगवान ,तथागत ,गौतम बुद्ध के लिए :-
बुद्ध बनो शुद्ध बनो ,
पापत्याग के लिए रूद्र बनो ,
लोभ के लिए छुद्र बनो
ज्ञानप्राप्ति के लिए क्रुद्ध बनो ,
बुद्ध बनो ,शुद्ध बनो
लेखक :- आप के साथ के लिए
रवि कान्त यादव एम्। कॉम २०१० विद्यापीठ ,वाराणसी ,उ.प.