गुरुवार, 27 मई 2010

उड़ते सपने -टूटते लोग भाग - 1














































अभी -अभी हाल ही शनिवार २२ मई २०१० में एयर इंडिया का विमान लैंडिंग के वक्त दुर्घटना ग्रस्त हो गया ,१५८ मारे गए कुछ रिश्ते वाले, कुछ पैसे वाले ,और कुछ परिश्रम करने वाले ,प्रशासन से ,लैंडिंग रन वे के आगे स्विमिंग पूल नहीं बना सकते तो ,लैंडिंग रन वे एवेरेस्ट ,अरावली ,और अन्य पहाडियों पर बना लो और उसमे मंत्री महोदय को बैठा दो और ओवर शूट -ओवर शूट का हल्ला मचा दो ,




सरकारी मतलब घर की तरकारी ,हर उड़ान पर ट्राइल ,चेक्किंग ,तो होगी नहीं ,सरकारी मतलब आराम के साथ काम ,निजी मतलब यहाँ काम घर पर आराम ,




अब क्या करे सारे सिस्टम में ही जंग लग चूका है ,हमारे पडोसी देश चाइना को ही ले ओल्य्म्पिक को पीछे छोड़ते हुए ,कहा से कहा पहुच रहा है ,हम वही है और रहना भी चाहते है ,क्यों की जो पुराने से चिपका रहेगा नया नहीं सोचेगा और पसंद भी नहीं करेगा ,जब तक वो फिर पुराना न हो जाये ,




हमारा देश गरीबो का देश कहा जाये तो कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी ,हमारे देश के निर्माता जवान ,किशन और शिक्षक है ,इसलिए जय जवान ,जय किशान और जय ज्ञान दान ,स्वयं शिखो ,ज़रूरत को शिखावो जो कुछ ज्ञान है ,दे दो ,




अभी अभी सर्वर की वजह से मेहनत पर पानी फिर गया ,


इसलिए कह गए कई महान पढो ,पधावो ,बाटो ,ज्ञान पावो सुख सम्ब्रीदी और सम्मान ,


जहा दिन सुरु होने पर रात का खाना और रात में दिन के खाने के लिए सोचना पड़ता है ,


तो क्या एक बच्चा पढने क्यों और किसलिए जायेगा ,तो उसे लालच दो ,ख़राब खाना दे कर सेहत मत बिगाड़ो ,उन्हें पैसा दो ,प्रवेश हेतु पिता से ओटल कार्ड लो ,


जहा खाने को नहीं अटता वह क्रायोजेनिक के चक्कर में १८ साल की MEHNAT AUR अरबो रूपी बर्बाद या पैसा गटक कर प्रयोग ही विफल बता दिया गया है ,इसे औसत के आधार पर बार -बार खिलौना बना कर प्रयोग क्यों नहीं किया गया ,क्या मॉडल ,डिजाईन ,सही था ,भगवान् जाने एक छलांग के चक्कर में ज्यादा मरना होता है ,जोखिम जो है ,जोखिम कम ही सही है ,क्यों की अधिक जोकिम सही नहीं ,होती ,


इन नकारा वैज्ञानिको को निकालो ,देश भक्त लावो ,


इसरो सिर्फ धन के लिए रो जहा भुकमरी है ,


हर विभाग का पैसा विभाग के लोगो और विभाग के देखभाल से ही नहीं पूरा होता ,उन्नति क्या खाक होगी ,


जलनिगम ,रोड को रोड वाले नगर निगम को ,नगर निगम वाले दूरसंचार को ,दूसंचार वाले ,जल निगम को ,जल निगम वाले ,विधुत्कीय को विध्हुत वाले वन व्हिभाग को वन भिव्हाग वाले रोड और विद्धुत विभाग को ही दोष देगे ,


टीम का मतलब ही होता है ,एक गलती एक बहार ,टीम में गलती और गलत आदमी के लिए जगह नहीं होती ,


कुछ नियोजित होता है ,कुछ ,सुनियोजित ,हर विभाग अपने कार्य का इन्सुरांस क्यों नहीं करा लेता ,


और दोष के लिए कोई नहीं मिला तो भगवन को भी दोष देने में सान होती है ,


रही बात हर विभाग के संगतःन के नए लोगो की तो कुछ २-३ साल में मोटा जाते है ,चर्बी जम जाती है ,


हबोकना सुरु ,देखा देखि साफ़ पाक लोग भी लिप्त हो जाते है ,


मान के पेशे में भी हबोकना सुरु हो जाते है ,मेरे क्लिनिक आ नहीं तो मर ,


मेरे कोअचिंग आ नहीं तो तू इशी क्लास में रह ,


मानो भूत का डर दिखा रहे हो ,अरे ये है वो है , आदि


एक माने जाने हॉस्पिटल में किडनी देने वाला और लेने वाला मर जाते है , क्यों


पोलिसे वाले केवल पैसे की भासा समझते है ,पैसा लेकर वाहन आगे जा कर किस्सी की जान भी ले सकता है ,एक बार एक पूल ही दह गया ,


गरीब ,लाचार को ऐसे दान्तेगेजैसे खौराह्वा कुत्ता हो ,


प्रधान मंत्री के यहाँ से चला धन ,ग्राम प्रधान तक आते आते १००-से ३३% ही बच जाता है कमाल की बात है उतने में ही रोड टका टक बन कर तैयार भी हो जाता है ,


किसी के पास खाने को नहीं ,किसी के पास पढने को नहीं ,किसी के पास इलाज़ को पैसा नहीं ,पैसा वाले है तो किस्मत कहा ले जाये पता नहीं ,क्यों की कभी कभी लाख कोसिस बाद भी लहरे और हवाए किस्ती को दूर GANTABYA SE DOOR KHICH ले जाती है ,


पता नहीं राजा बेटा पढ़ेगा जा पैसे से मस्ती लेगा ,या घर को ही छोड़ कर कही बस जायेगा ,


इस देश में आयकर विभाग से लेकर सी .बी। आई । तक बिकने के मौके भुनाने को नहीं जाने देती ,


जनगणना तो हो रहीC है किस घर में एक टाइम चुल्ल्हे नहीं जलते ये गिनती नहीं होगी ,


मुस्लिम धर्म में भी आमिर है तो खूब है गरीब है तो हद है ,सायद इसलिए भटक जाते है ,आज संगीत गायकी में ८०% इनकी आवाज़ भाती है मै मर जा उगा पर अपने वालो को बचा लूगा यही इस्लाम धर्म है ,इसमें अलग और सर्वोपरी केवल मासाहार त्यागने वाले ही अलग धर्म बना सकते है ,मार पीट हमारी परंपरा नहीं है ,अँगरेज़ लाये थे छोड़ गए अब डब्लू डब्लू ऍफ़ या ई से शिखा रहे है ,


यहाँ शेर मेमने से विपरीत जल धरा के बाद भी पूचता है ,तुने मेरा पानी क्यों जूठा किया ,


अब इस का उपाय आप ही बतावो , हां अलग अलग जबाब मिलेगे


संसद में कुछ लोग फिल्म देखने से ज्यादा रील बदलने का इंतज़ार करते है ,


ये नेता लोग तो अफीम और धतूरे के फूल है ,


हमारे देश में आज भी आनाज के खेतो से आनाज काटने के बाद कुछ लोग आनाज उठाने को झाड़ू लेकर पहुच जाते है ,मै सोचता था आज के लिए शिक्षा ,चिकित्चा ,और रोज़गार आवअसक है ,ज़रूर मिले ,पर जहा रोटी कपड़ा और मकान के ही लाले है ,तो ये कहा तक संभव है ,जब चूल्हा चौका बर्तन ही न हो तो खाना कैसे बने ,ठीक यही हाल गरीबी और गरीबो में बिजली और बिजली की स्तिथि है ,भिखारियों को सचल पसु बंदी की तरह पकड़ो और मोमबत्ती के कारखाने में भेज दो ,......अब गूगल पर नहीं लिखुगा इसी नाम से ट्विटर पर हु ........मेरा पुराना अकाउंट चोरी हो चूका है , सब कुछ ट्विट्टर पर ब्लॉग से ......ज़िन्दगी रही तो मिलते रहेगे .......क्रमशः ................

शनिवार, 10 अप्रैल 2010

प्रशंसा










आज २४ अप्रैल है ,भारतीय हीरो सचिन तेंदुलकर का जन्म दिन है ,वे ३८ साल के हो जायेगे ,इंडिया टी.वि । किसी काम तो आया ,२० साल के खेल में सचिन के पास सब कुछ है ,वही आत्म विस्वास ,नियंत्रण ,छोटा कद ,गुन्घ्राले बाल ,और वही तेज़ दौड़ ,लेकिन पहले की अपेक्षा खेल में कभी कही फूट वर्क की कमी महसूस होती है , लेकिन आश्चर्य धोनी स्ट्रा इक देते तो २०० रन भी कम पड़ते ,
उन्हें चोट नहीं लगानी चाहिए ,उन्हें दुःख दर्द न हो ,वे ४५ के उम्र तक खेल सकते है ,सौरव से उम्मीद थी की वे अपना सन्यास जोरदार विस्फोटक पारी से करे लेकिन निरासा हुई ,वे खेल सकते थे ,
सचिन वर्ल्ड कप जिताना चाहते है ,भारतीय खिलाडियों को उनका साथ देना होगा ,सतर्क रहना होगा ,चौतरफा ध्यान देना होगा ,भर पाई ऐसे ही होती है ,डरना नहीं होगा ,दबाब में बल्ला न थामना ,फुर्तीला होना होगा ,अपने ऊपर बिस्वास करना होगा , jokhim में अपना विकेट बचा कर रखना होगा ,उछालती गेंद चालाकी से खेलना होगा ,अपने गुण को दिखाना होगा ,जो लिखा हु वो न बनो जो हो वो बनो ,बाल को ताकत से दिशा देखकर और दिसा में भेजना होगा ,और हवा के शाट देखकर या नहीं खेलना होगा ,बोल्लर विपक्षी को एक एक रन को तरसा दो ,चौका गया कोई बात नहीं ,ये बाल अगली बार बल्ले बाज़ छु भी नहीं पायेगा ,विश्व कप हमारा होगा ,याद रहे ब्रम्हांड में चतुरता ,चपलता ,ताकत ,सहन शक्ति ,साहस , को सामान को छोड़ कर कोई नहीं हरा सकता ,
जी तोड़ परिश्रम ,प्रयास ,से श्री गणेश और माँ सरस्वती का आशीर्वाद बना रहता है ,
कर्म ,धर्म ,यादे ,साथी ,भटकतो के लिए चार पंक्तिया
धीरे धीरे पल, दिन ,महीने,गुजर जाते है ,
कोई राह बनाता है ,तो कई थक कर ,चल ,कर मंजिल पहुच जाते है ,
मिट ता कुछ नहीं ,पर बनाने वाले ही मिट जाते है ,
vaah रे प्यार राह से ,ये राह भी अजब है,उस पर चलने वाले भी बढ़ते ही चले जाते है ,
आइये जानते है आराध्य देव श्री गणेश को ,
श्री गणेश जो बुद्धि के देवता है ,वे खुसी और प्रसंशा में बसते है आप के साथ रहते है ,उनका कार्य अपने सूड़ की तरह सभी देवतावो व उन्हें प्रोत्साहित कर शक्ति बढ़ाना और प्रोत्साहित कर उनकी शक्ति में निखर लाना होता है ,वे एक सच्चे प्रसंसक है ,जो अच्छाई की जम कर तारीफ करते है ,ताकि वे अच्छाई का साथ न छोड़े ,वे सभी देवतावो के कार्य गुण की तारीफ़ ,सम्मुख करते है ,तथा उनके भक्तो को मिलाते है ,अपने भक्तो को राह दिखाते है ,सभी देवतावो के आशीर्वाद ,सफलता, स्वरुप आशीर्वाद के रस्ते को प्रसस्त करते है ,
तथा खुसी को नजर न लगे इसलिए विघ्न विनासक भी है ,
सभी देवतावो को प्रोत्शाहन उर्जा प्रदान करते है ,इसलिए सभी देवता के रूप में गढ़ है ,
एक बार वे श्री कृष्ण से भी मिलते है ,मिलते ही गुण गान ,प्रसंसा ,अपने ल य में थे ,श्री गणेश श्री कृष्ण की तरफ देखते है उनके मन चेरे पर कोई कोई भाव या खुसी नहीं थी ,कोई उर्जा का संचार नहीं कर पा रहे थे ,
श्री गणेश कहते है ,प्रभु मै ने यह बहुत कम ही देखा है ,लगता है सभी देव्तावो के आशीर्वाद लेने के पश्चात आप का नहीं मिल पायेगा ,श्री कृष्ण भाव विभोर हो जाते है ,
कहते है मुझे कुछ नहीं आप की मित्रता चाहिए ,
अब श्री गणेश भाव भिह्वल हो जाते है कृष्ण ,श्री गणेश से कहते है ,आप बहुत खूबसूरत है और अपनी प्रिय मोर पंखी श्री गणेश के माथे पर अलंकृत कर देते है ,
इस तरह श्री गणेश श्री कृष्ण के प्रसंसक ही नहीं मित्र भी बन जाते है ,मित्रता से दोनों एक दुसरे के प्रसंसक बन जाते है ,
तो आज इश्वर ने हमें एक और नया दिन दिया उसका धन्यवाद करे नायको की सच्ची प्रसंसा करे और सच्चे मित्र तलासे ,
कर्म ,मधुरता,और आशीर्वाद के लिए
बजी जो बंसी स्वरों ने सलाम किया ,
होठो को रोका पर सांसो ने नाम लिया ,
अजब दिया भी ऐसा की कुछ भी न लिया ,
कोई बता दे ये ,प्यार है या प्रतिभा लगे सारा जहाँ पा लिया ,
वैसे प्रसंसा वह एक औसधी है ,जो समय के साथ चलते रहने पर विष बन जाती है ,
दोस्तों चिपके रहो मेरे ब्लॉग से,
हो सके कुछ मिल जाये आप के भाग से ,,
इंडियन ........म.गा.का.वि.पि। २०१० एक खोया व्यक्ति ..................म.कॉम.2010

गुरुवार, 11 मार्च 2010

डर

पंडित वीर भान मिश्र एक शांत धर्म कर्म में रूचि रखने वाले ४१ वर्षीय व्यक्ति थे , प्रतिदिन अपने घर के पास मंदिर जाना उनकी दिनचर्या थी , जिससे उनको चैन मिलता था ,परन्तु गृहस्त जीवन से उन्हें कुछ दिन के लिए सहर जाना पड़ा ,उनका दिल यही मंदिर पर अटक रहा था ,तो उन्होंने बड़े मनोयोग से अपने पुत्र छोटू को पूजा का दायित्य सौपा ,वो अपने पुत्र को पूजा पाठ का सामान देकर ,कहा बेटा ये थाली अक्षत मंदिर में पूजा कर आना और ये दूध का भोग भी भगवानको जरुर लगा देना , छोटू एक नौ वर्षीय अबोध बालक था ,पिता की इच्छाके अनुसार वह मंदिर जाता है ,अपने तरीके से पूजा पाठ करता है ,अपनी पूजा पाठ से संतुस्थ वह वापस लौटने को होता है ,तो उसकीनजर दूध के कटोरे पर गयी ,अरे भगवान ने तो दूध पिया ही नहीं ,फिर वही बच्चा हठमान ,मनौवल ,१० मिनट बाढ़ भी भगवान दूध नहीं पीते है ,तो अथक परिश्रम बाद छोटू को क्रोध आ जाता है ,छोटू कहता है ,भगवान जी कह रहा हु न ,ये दूध पि लो नहीं तो मुझसे बुरा कोई न होगा ,अब क्या मजाल कोई कैसे न माने पलक झपकते ही भगवान आकर दूध का कटोरा खाली कर देते है ,आधे घंटे तक बच्चे से खेलना मान मनौवल के बाद अब बारी भगवान की थी ,परेसान हो कर बोले छोटू अब मुझे जाने दे ,छोटू ने भी sart रख दी ,अब दूध पिने में देरी न करना ,और यह सिलसिला छोटू के पिता के आने तक सात दिनों चलता रहा ,....... अतः बच्चो की जिद ही उन्हें बनाती और बिगाड़ती है ,उन्हें दूध का कटोरा जमीन से उठा कर स्वयं दूध ग्रहण करने की योग्यता विकशित करनी चाहिए ,अतः जिद का कारन जानने से उन्हें सही मार्ग दरसन किया जा सकता है ,अगर आप जिद्दी है तो आप में बहुत उर्जा है ,जिद्दी महान खिलाडी भी बन सकते है ,अधिकतर खिलाडी अनाड़ी हो सकते है ,और अनाड़ी खिलाडी साबित होते है ,बच्चो को बताये कैसे कमल कीचड़ में रह कर wahaa से उर्जा लेकर खिल कर फूल बन जाता है ,उसी तरह दिल की उर्जा को दिमाग तक ले जाये गन्दगी निचे रह जाएगी ,जल भी तो इसी प्रकार सुद्ध होता है ,विचार अच्छे हो तो अच्छी चीजे प्राप्त होती है ,बच्चो हा बच्चो की आवाज़ और तड़पती इच्छा को सुन लो ,दिल से छनकर जो विचार दिमाग तक जाते है अच्छे होते है ,माता की कृपा इन्हें मिलती है ,यहभी सिद्धि है , अनायास ही यह गौतम बुद्ध को प्राप्त हो गयी थी ,उनके जिद को भी एक माता देवी ने तोडा ,व ज्ञान दिया , श्री कृष्ण की शक्ति भी इसी से बनी ,

रविवार, 28 फ़रवरी 2010

पिसते लोग .....और बनती चटनी भाग 1











मै न कोई बाबा हु न कोई हीरो मै एक देश भक्त हु , यदि कही कुछ दे सका और आप उसे उतारते है , तो ठीक भी है नहीं भी ,क्यों की प्यासा जल को कंठ से निचे ले जाये तो राहत में भी आह कर उठेगा ,आज मै फिर लिखने को विवस हु देश के ८० जवान सायद ७६ जिनके लिए कार्य करते थे ,उन्ही लोगो ने मार दिया या तो हम उनके लायक नहीं है ,या वो हमारे लायक नहीं है ,यदि हम शक्ति लगाते है ,तो कस्ट तो दोनों ही तरफ होगा घरो को दुःख तो होगा ही सायद गाँधी जी यही कहते थे ,हिंसा किसी समस्या का समाधान नहीं है , या रास्ता अन्य नायको अनुसार कंटीली झाड़ियो को काट कर बनाया जा सकता है , लेकिन दुःख तो होगा ही ,रक्षक बनो भक्षक नहीं ,कभी हमारी प्रधान मंत्री कहती थी जब देख भाल नहीं कर सकते तो पैदा ही क्यों करते हो ,तब हमारे ही देश के धर्म ने कहा देख भाल तो ईश्वरकरता है ,
अपने हाथ की लकीर न देखो उसे हम बनाते है वो हमारे हाथ में है ,अपने हाथ की शक्ति देखो कर्म करो नहीं धर्म करो वो कर्म को उंगली बनकर रास्ता दिखायेगा , मै गृह मंत्री होता तो इश्तिफा देता तो देना मतलब देना मस्के बाज़ी में भी उसे स्वीकार नहीं करता सायद गृह मंत्री कही बंधे हो , कश्मीर से लेकर कन्या कुमारी तक प्रॉब्लम है ,
यदि हम पाकिस्तानी भाई चीन से अपनापन को वो हमसे खुस नहीं है तो कश्मीर से होने वाली कमाई का कुछ हिस्सा उन्हें मिलना चाहिए याद रहे गलती सजा तब बनती है जब दुहराया जाय ,
दोस्तों देश का पैसा जा कहा रहा है ,महगाई बढाती जा रही है ,गरीब मरते जा रहे है ,किषानो की आबादी घटती जा रही है ,इसी तरह रहा तो खेती कौन करेगा ,
क्या पैसा कागज़ होता जा रहा है ,देश का पैसा यहाँ के नागरिक ,यहाँ की जमीं ,यहाँ के श्रोत ,उत्पादन ,और परिश्रम है ,हमारा देश ६०% तक किशान प्रमुख और व गरीब है ,लेकिन केवल अमीरों की चलती है ,यदि हमारी सरकार किषानो को हक़ देने में योग्य नहीं है तो चिप्स और बिस्किट की कंपनी खोल ले ,पैसा को तो हम खा पि नहीं सकते ,तो यही हो सकता है की ,सारे देश में कुछ पैदा ही नहीं होता ,यहाँ बंजर ज़मीं है ,नदी नाले या साधन नहीं है ,या तो खेत घटते जा रहे है ,और आबादी बढाती जा रही है ,और या तो ये हो सकता है जो कुछ पैदा हो रहा है ,उसे दबा लिया जा रहा है ,या बाहर भेज दिया जा रहा है ,जो दीखता है वो बिकता है ,लेकिन जो नहीं दीखता मिलता वो कीमती हो जाता है , जैसे हिरा सोना छिपे होते है ,
भारतीय मुद्रा डोल्लर के मुकाबले २० - २५ होनी चाहिए यूरो की तर्ज़ पर एशियन असीन आनी चाहिए ,
विदेसी कंपनियों को थोडा भी बढ़ावा न दो भूल गए क्या गाँधी जी ने भी कहा है ,आज महगाई की आग लगी है ,ये विदेसी कंपनिया दीमक है ,
आज १ अरब १० करोड़ वाली जनता ८० %महगे और विदेसी उत्पादन उपकरण आदि इस्तेमाल माल कर रहे है तो महगाई क्या ख़ाक जाएगी ,
जब १०-२०-२५ पैसे चलन से बाहर हो सकते है तो एक समय पर १ -२-५ रूपये भी अपनी कीमत खो दे ,या इनकी कीमत १०-२०-२५-पैसे भर रह जाये ,
विदेसी तो अपने तकनीक द्वारा भी हमारा नोट छाप कर भी अर्थ व्यवस्था को बिगाड सकते है ,
हम पहले चेत ते नहीं बाद में मरने पर चिल्लाते है ,हम अपने बने बनाये ढाचे को ही नहीं संभाल पा रहे है ,
कारण सभी जानते है ,बाहरी कारन है तो देश की सीमा ही बंद कर दो ,हमारे पास कमी नहीं नहीं है ,आज भी रेल वही पुराने अन्ग्रेज्वो के बनाये पटरी पुलों पर ही चलती है आज भी उनके बनाये bijli के खम्भे ,तार है उनके बनाये पानी के पा इप से आज ठीक पानी नहीं aata ,
अपने ही देश घर में हम जनता सुरक्षित नहीं है ,हा रस्म जरुर निभा इ जाती है ,इतने बड़े देश में समस्या है ,इसलिए अलग देश या राज्य की मांग उठती है ,अलग राज्य दे दो न ,
सरकार कहती है मै दूर दर्शी कार्य क्यों करू क्यों की उसका सारा क्रेडिट अगली सरकार या मंत्री ले लेगा , फंड आते है और फुश हो जाते है ,जनता के साधनों का मूल्य वृद्धि ,स्थान ,सरकार हमारा ही धन लेकर अपने लिए व्यक्तिगत प्रयोग करती है , जो कुछ है उसे ही संभाल नहीं पा रही है तो विकाश क्या खाक होगा ,साल में दो - तीन रेल दुर्घटना जरुरी है ,एक दो सेना के विमान क्रश हो ही जाते है , ४-६ बड़े हमले भी हो ही जाते है ,आदि आदि
यदि एक स्वतंत्र देश विकशित बनाया जा सकता है तो ,वहा के नागरिको से ,स्वतंत्र देश का कोटा ३० साल में विकशित बनाया जा सकता है ,नेतावो द्वारा नीद वो भी हराम की को त्यागना पड़ेगा ,हर समस्या विकराल होती है ,
नौकरी के लिए युवा पिरान्हा मचली बन जाते है ,
पैसे के लिए पद चाहिए ,पद के लिए पैसा चाहिए और पद है तो उसका दोहन चाहिए
६०% लोग पद का गलत प्रयोग करते है ,अपने सपथ पत्र को भूल जाते है ,
योजना व्यय के लिए नहीं लाभ ,मदद ,रोजगार ,और अर्जन दे तो सफल है ,
कुछ तो ख़तम हो जाये गा कुछ रहेगा जो रहेगा वह भी थोड़े समय के लिए ही रहेगा यही लोभ लालच है ,अर्थात जो कुछ है थोडा है ,और जो है वह भी ख़तम हो जायेगा यही लालच है ,
मुझे लगता है ये सेठ बनिया लोग सामान कम ज़हर ज्यादा बेचते है ,मिलावट तो इनके खून में ही है ,एक बार फिर हमारे पास सब कुछ है पर हम उसे संभाल क्यों नहीं पा रहे है ,

ये नेता लोग हमारे प्रतिनिधि है या हमें तास के पत्ते समझते है ,कभी कभी कह भी देते है मै अगर हरिश्चंद होता तो आज यहाँ नहीं होता ,संसद में कौवा राग क्यों होता है ,सब झूठ ही काव काँव करते है और अपने गिरेबा में झांकते तक नहीं कितना हमारा बैलेंस है ,यहाँ तक की बैलेंस भी नहीं देखते ,ज़रूरत ही नहीं है ,अकूत दौलत जो है ,देश की कौन कहे विदेश में अकूत दौलत है ,पता नहीं कैसे ये लोग देश में आग लगाकर बड़े प्रेम से होली मानते है ,ठीक भी है जनता केवल रंग देखती है ,
वाह रे भारतीय नेता काँव काँव करके बस पद चाहिए ,मेरी सरकार तो है नहीं पूरा जोर लगा दो जनता खुद ही त्राहि त्राहि कर अगली बार जीता देगी ,काँव काँव करने की क्या जरुरत है जब आप के पास मत का अधिकार है , जनता उल्लू नहीं है ,संसद के कार्य में बाधा न डालो ,
और यदि आप अपने विचारो को सुद्ध नहीं रखते है ,तो आप परेसान रहेगे परेसान करेगे और खुस भी नहीं रहेगे ,
और हां विचारो सोच को तो भगवान् भी नहीं रोक सकता हा वे सुद्ध किया जा सकता है ,
बच्चा ,वृद्ध ,महिला , पर अत्याचार हो रहा है ,भोली भली जनता पिस रही है और आनंद नेता,भ्रस्त , और पैसे वाले ले रहे है ,
भारत भ्रस्ता चार में टॉप ५ में आता है , ये हम स्वयं अपने देश को खोकला कर महगाई बढ़ाते है ,सभी का योगदान होता है तो गाँव में झोपड़ी उठती है ,
गिने चुने ही सच्चे रह गए है ,और वे भी भ्रस्ताचार के विशाल वृक्ष के निचे दम तोड़ देते है ,यहाँ लालच है ,जलन है ,रुदिवादिता है ,अनियमितता है ,अव्यवास्ता है ,लापरवाही है ,चापलूसी है ,कानून तोड़ने वालो के लिए खिलौना है , और जो नियम कानून है वो भी कछुवा चाल से चलता है ,
हमें जरुरत है परिणाम नहीं कारन को हल करने की ,एक सुरक्षा लाख नियामत की ,
आज बच्चो के लिए स्कूल है लेकिन लोग अपने बच्चो को प्राइवेट महगे शिक्षा संस्थानों में क्यों भेजना पसंद करते है ,जबकि ये लोग मनमाना फीस लेते है ,और देते क्या है निपोर चरखा ताई ,बेल्ट ,कार्ड ,और भगवान् पता न क्या क्या ,
दो पंक्तिया देश ,भाई चारे ,और अपने सम्ब्रिदीके लिए
सुखी धरती करे पुकार ,
जनता में है ,हाहाकार ,
नेतावो को है धिक्कार ,
हे भगवान् हो देश का उद्धार ,
भाई चारे का मिट ता प्यार ,
कही बन्दूक कही तलवार ,
देश तो है अपना परिवार ,
बंद करो अब ये तकरार ,
भ्रस्ता चार है बेकार ,
बंद करो अब अत्याचार ,
देश तो है अपना परिवार ,
देश तो है अपना परिवार ,
सभी पैसे व प्रसिदी के लिए जी व काम कर रहे है ,देश के लिए कौन जी रहा है ,
भोग बिलास्ता पूर्ति पश्चात इनकी आवस्यकता बढ़ जाती है ,ये दावानल है ,आग है ,
अंत में आप सुद्ध है तो आप दुर्लभ है ,और यह आत्म मंथन के ज्ञान से ही होता है ,
कोई भी ताकत की कीमत तो चुकानी ही पड़ती है ,
याद रहे आप स्वयं भगवान् है ,कैसे आप के अन्दर पांच अग्नि ,वायु ,जल,धरा ,और ,आखिरी अनखोजे अनंत आकाश है ...........................................................................................................सभी को संतुलित रखो और उनका अधिकार दो ...........अभी बस और अगले बार एक खोया हुवा व्यक्ति ......म.ग.का.वि.पि। म.कॉम। वाराणसी ,२०००९-10

गुरुवार, 25 फ़रवरी 2010

सच्चा सचिन




सचिन का मै पुराना प्रसंसक हु , सायद मै पहली बार क्रिकेट देख रहा था , तब से ,खेल में बाल कहती है आप जहा भेजे बासऔर इसी तरह प्यार से भेजे ,गज़ब का कांफिडेंस और नियंत्रण मेरे ऊपर भी क्रिकेट का नसा चढ़ा और क्रिकेट के लिए हलुवा और समाज में कलुवा बन गया ,मै यहाँ क्रिकेट पर कुछ नहीं बोलूगा ,क्यों की ये पूरा पन्ना सचिन रमेश तेंदुलकर का है ,यदि भारत में क्रिकेट धर्म है तो सचिन उसके देवता है ,सर्जाह अकेले फतेह और शेन वार्न की धुनाई से लेकर सचिन अकेले थे ,और आज भी है जो ,नीरस दिन को भी होली दीपावली बना देते है ,एक समय ऐसा भी आया जब सचिन आउट होते थे तो लोग टी.वि । बंद कर देते थे ,आज भले ही भारत न , १ है ,परन्तु मैक ग्रथ और मुरली धर जैसे बोव्लर की कमी है ,एक रन नहीं बन्ने देता और दूसरा विक्केट के साथ रन रेट पर भी अंकुश लगाता है ,बोवलर की कमी को भारत के अब तक के सबसे ताकतवर बल्लेबाजों ने ढक रखा है ,ये वही सचिन है ,जिसके लिए पूरी विपक्षी टीम केवल सचिन के विक्केट के लिए खेलती थी ,और विक्केट लेकर ऐसा नाचते है जैसे मेढक को विज्ञानं कक्षा में रखते है ,या ऐसे कुदेगे जैसे कोई कर्रेंट लगा हो ,सचिन अब बाउंसर पर जरुर मुस्कराते है ,पाकिस्तान को लौट कर मुह तोड़ जबाब देते है ,और उनके विचारो को भी सुद्ध करते है ,कई देश केवल उन्ही को देख कर पिच तक बनवा देते थे ,कभी कभी वो ऐसा खेल खेलते है मानो बल्ला गन हो और चारो तरफ केवल नॉन स्टॉप धुल और धुवा हो , वे बेसक क्रिकेट के देवता और भारत रत्न के गर्व से हक़दार है ,एक भारत तीय होने के नाते मै ,मै उन्हें इससे बड़ा सम्मान पाते देखना चाहता हु ,सचिन का अपने बल्ले से प्रेम उनकी क्रिकेट पूजा को दर्शाती है , वे सदैव रन के भूखे रहते है ,और अपने विक्केट के अमुल्यता को बनाये रखने की कोसिस करते है ,वे प्रथम २, ४, सीढियों के मूल्य को पहचानते है ,वे क्रिकेट के लिए समर्पित है ,सचिन पर उठने वाली हर उंगली स्वयं में टेडी है , वे कितना ही मैच अकेले जीता चुके है , और भारत के सम्मान की रक्षा की है ,यही नहीं कई मैच में अपने बवलिंग से भी करिश्मा किया है , आधी टीम को अकेले ही छुट्टी कर दिया है , लेकिन हम आज भी उनके दो ओवर देखने को तरस जाता हु ,कल्लिस की क्या औकात है ,सचिन के सामने ??,हम खुसनसीब है ,जो उनको खेलते हुए देख रहे है ,वो अपने आप में भारत के गर्व है ,उन्होंने एक अच्छे महान खिलाडी को निर्माण एक ,अच्छे व्यक्तित्वों के साथ रखा है ,वे अपने गुरु जी का आदर सम्मान और गरिमा गान करते है ,इश्वर की शक्ति को पहचानते है ,और उसके सन्देश को दिल से निभाते है ,और कर्म ही पूजा है का सन्देश देते है ,वो रिकॉर्ड बनाने के लिए नहीं खेलते ,रिकॉर्ड उनको नमन करने के लिए बनते है ,सचिन देश की सीमा पर विराजमान हमारा विजय ध्वज है ,उनका वास्तविक कद बल्ला उठाये सूरज की चढ़ती धुप से बन ने वाली परछाई है ,जिसका वजन उनके पैर है ,उनका अहंकार जमीं पर सरक कर वो भी इस मुकाम और उम्र में फील्डिंग जितना है ,कहते है प्रसंसा अगर ................. लेकिन मै नहीं रुकुगा , मै तो कहुगा उन्हें भारत में एक बार मैन ऑफ मैच में मराठी भी बोलनी चाहिए , दिल का प्यार दिमाग को ही सही नहीं करता बल्कि पवित्र भी होता और पवित्र भी कर देता है ,और दिमाग का प्यार रोग ही फैलता है ,

यदि सचिन का रिकॉर्ड कोई तोड़ सकता है ,तो वो केवल कोई गणपति भक्त अन्य सचिन ही तोड़ सकता है ,जिसकी खुसी सचिन रमेश तेंदुलकर को भी होगी ,और सचिन वही हो सकता है ,जो जितने और जिताने के लिए खेले सच्चे सचिन के लिए ...........

जय भारत के वीर महान ,

क्रिकेट के आन ,बान और शान

भारतीय जनता के दिलो की जान ,

सर्व शक्ति गणपति का जिन्हें है ,भान


श्री कृष्ण सरन म मम: मम :,

सचिन रमेश कभी आये मेरी गली तो स्वागतम स्वागतम ,स्वागतम ,


आवो एक बार देश के लिए और सचिन के लिए बोले ,

ॐ लम्बोदर ,गजानन ,गम गणपति,सिद्ध विनायक नमो नमह :


इंडियन अ लोस्ट पर्सन........म.कॉम। म .गा.का .वि. पि .विस्वा विद्यालय वाराणसी ......२०१०.......




गुरुवार, 18 फ़रवरी 2010

ईर्ष्या जन्म -और सानिध्य




ईर्ष्या कोई नयी बीमारी नहीं है ,इसका जन्म बहुत पहले ही हो चूका था ,रामधारी सिंह दिनकर की कृति ईर्ष्या तू न गयी मेरे मन से तो पढ़ा ही होगा ,ईर्ष्या सदा कमजोर ही करते है ,जिसे ब्रहमांड शिक्षक कृष्ण ने साबित किया , द्वापर में कृष्ण की बढती प्रसिद्धी, गुरु पुत्र वापसी हेतु बलराम संग हाथो में हाथ लिए समर्पण व भावना से बलराम संग मानस भौतिक रूप में यमपुरी विजय ,ब्रह्मा का मान मर्दन ,इन्द्र का गर्व खंडित करने से छोटी उम्र के उनकी यश कीर्ति से विष्णु भी अंजान न रह सके ,साथ में विष्णु के मनोभाव को पिता की तरह विशाल हृदय माँ लक्ष्मी ने पढ़ लिया ,
माँ लक्ष्मी ने कहा प्रभु ,कृष्ण भी तो आप ही के संतान है ,तब भगवान् विष्णु ने कहा हे देवी मेरे अन्दर यह षडिक (बहुत थोडा )इर्ष्या जन्म हुआ कैसे ,जब की मै जग कल्याणकारी गंगा के सानिध्य में रहता हु ,देवी ने कहा देवी गंगा तो अपना दायित्व वहन ही तो कर रही है ,अतः यह सब बढ़ते पाप का असर है ...................??...प्रेषक .इंडियन ,म.कॉम.२ 2010

शुक्रवार, 12 फ़रवरी 2010

हारा ........




आज हर कोई कही न कही परेसान मिल जायेगा ,कोई के लिए बड़ी परेशानी है तो कोई थोडा बहुत परेसान है , आज के इस कलयुग में अच्छे लोग कम और बुरे लोग ज्यादा है ,अतः भावना में कोई निर्णय सोच कर ले ,विष सर्प का स्वाभाव होता है ,अतः संपर्क में भी सावधान रहे ,यहाँ दो पंक्तिया हारे को

तन्हाई की तलाश में समंदर की आगोश में गया,

किसी ने कहा पागल तो किसी ने कहा होश में गया ,

समंदर ने माँगा साथी जो कही रह गया ,

सजा दिया यही जहा से चला वही आ कर रह गया ,

दुनिया ही दिखाती ,सिखाती ,और ढालती है ,कोई एडिसन ,आइन्स्टीन ,गाँधी, सिकंदर, बावला आर्कमिडीस ,और दयासागर गौतम बुद्ध नहीं होता है , यही दुनिया उसे बना देती है ,इसलिए दुनिया बहुत सुन्दर है ,जीवन से सिकायत करने वाले ठीक ऊपर लिखे सायरी की तरह समंदर में फेके हलके वस्तु की तरह स्वयं वही आ जाते है , जहा से चलते है ,यानि सब व्यर्थ इसलिए पिचड़े नहीं ,सामना करो और विकशित बनो , नहीं कुछ तो दर्शक होने में क्या हर्ज़ है ,अब यहाँ ब्रह्माण्ड शिक्षक की वो बात तुम्हारा क्या गया , क्या लाये थे , क्या लेजयोगे,जो लिया यही से लिया ,कर्म करो , आदि आदि पढो .................

हा याद रहे पाप की सुरुवात ही मद होकर चरमता है , एक चिंगारी सब कुछ नास कर देती है ,इसलिए हिन्दू हाथो में रक्षा सूत्र बांधते है ,ताकि बुरे कार्य पर प्रथम नज़र पड़े और उसमे लिप्तता न हो और तिलक लगाते है ,की कोई राह दिखाए जिससे अनजान है ,अतः बुरे की,पाप की पहचान प्रारंभ में हो जाये तो सबसे उपुक्कत है ,स्वयं ज्ञान हो या पाप से बचने के लिए सरन ली जाये दो तरीका है , भगवान की पूजा पाप ,व बुरे कार्य से बचने के उद्द्येश्य से हो तो वो सर्वोत्तम होती है ,

पुरुष पुरुसोत्तम हो सकता है , परमात्मा नहीं ,यही हमारा प्रयाश हो ,या होना चाहिए ,इसका बोध उस वक्त कराया जाता है , सब बोलते है एक निसब्द शांत सुनता है ,

समय प्रमुख ५ पांच देवो से भी बड़े देव है ,ब्रहमांड में सर्वोपरि है ,

कलयुग अभिमानु पुत्र परिच्छित , से बता कर मानव के जीवन को छोड़कर जीने पर उन्हें घेर लेता है , जैसे अहंकार ये भी तो मदिरा सामान है , चरित्र हीनता , क्रोध, से हिंसा , बिना परिश्रम के धन ,इनके शाखावो को खोजो वर्गों में रखो , हिंसा में आनंद , आदि आदि , कलियुग जो पेंडिंग थे , या था अपने स्तर पर सिपाही बनायेगे ,ये कलयुग परजीवी जैसे है ,हिंशा ,धन, चर्रित्र,नशा,आदि के घालमेल से अपना प्रकोप दिखायेगे ,और सजा भी देगे ,

विकल्प इस युग या समय के लिए जैन धर्म के सिद्धांत ,मन,के सत्य , धर्म, न्याय ,के तराजू ,से आपकी कमाई ,मरेगी नहीं ,दुःख नहीं होगा ,मैंने कहानी भक्ति और भावना के जरिये जो बात कहने की कोसिस की है , उसे पढ़े ,हिन्दू मानते है मानव जन्म ८४ लाख जन्मो बाद मिलता है ,पुण्य मिटने या कमजोर होने पर देवता भी मानव जन्म पाते है ,अतः आप भी देवता बन सकते है ,परन्तु देवता भी पूर्ण नहीं होते है ,

मानव प्रविती और मृत्यु सत्य के लिए ,दो सब्द .....


सभी चलते है ,मंजिल की तलाश के लिए ,

मंजिल से अनजान मंजिल की आश के लिए ,

मंजिल आयी भी तो सब कुछ नाश के लिए ,

जिस लिए चले व्यर्थ हो जाये सब एक मोह pass के लिए



दो सब्द सत्य और शक्ति के लिए ..........

समय के चार पहर सभी के पहरेदार हो गए ,

समय ने खेल दिखाया और फिर वही चार पहर सभी के हजिरदार हो गए
म.कॉम.२००९-१०