गुरुवार, 2 सितंबर 2010

वचन और आशीर्वाद





वैसे तो वचन और आशीर्वाद अपने अपने जगह है पर ,पर कही न कही एक के आधार पर दूसरी की अहमियत है ,

बात कुरुक्षेत्र की है ,युद्ध के लिए दोनों तरफ सेनावो का तुमुल जुटाव था लडाई धर्म और अधर्म की थी ,दृश्य देखकर अर्जुन ,कृष्ण से कहते है केशव क्या मुझे यही दिन देखना रह गया है ,

कृष्ण कहते है , पार्थ युद्ध तो आखिरी विकल्प होता है ,युद्ध रणभेरिया बजने में देरी थी ,

अब अर्जुन का मोह भंग होने से अर्जुन अजय प्रतीत हो रहा था ,अर्जुन कहता है केसव मै युद्ध के लिए तत्पर हु ,

श्री कृष्ण कहते है ,पार्थ तुम कुछ भूल रहे हो , जिसके बिना तुम्हे युद्ध विजय नहीं मिल सकती ,अर्जुन कृष्ण के कथन को समझ जाते है ,और और पैदल ही विपक्षी सेना की तरफ चल पड़ते है ,दुर्योधन आदि को ससंकित अंदेसा होता है ,वह कौरव की सेना में जाकर गुरु ,क्रिपाचार्य ,द्रोणाचार्य ,और पितामह भीष्म आदि आदरणीय लोगो का आशीर्वाद लेते है ,

भिसन रक्तपात से युद्ध समाप्त होता है ,कौरव का विनाश हो जाता है ,कृष्ण गांधारी से मिलते है ,एक माँ के हृदय की ममता जाग उठती है ,वह कृष्ण को कोसने लगती है ,कहती है क्या मेरे सभी १०० पुत्र अधर्मी थे ,तुम केवल खून बहते हुए देख सकते हो अपना खून बहा नहीं सकते ,युद्ध की तरह गांधारी के सभी अभिशाप को वह श्री कृष्ण सहर्ष स्वीकार कर लेते है ,

कहते है समय आएगा तो ,अपना खून भी बहा कर दिखा दुगा ,,,माँ सरस्वती मेरा साथ देना ,,,

लेखक :- पक्षपाती , एम् कॉम २०१० विद्यापीठ ,वाराणसी ,विश्वा विद्यालय .................अन्य ड्राफ्ट

मै महान ...















वह एक मधुर भाषी था ,थोडा बहुत ज्ञानी भी था ,और सुन्दर भी ,लोगो का वाणी से उपचार भी कर देता ,लोग उसको सम्मान देते ,धन भी चढाते , धीरे धीरे उसके अन्दर गर्व गया ,सम्मान करवाने में आनंद उठाता ,गर्व बढ़ा और समाज के लोगो को अपने से तुच्छ समझने लगा ,और अपने को अलग ऊँचा समझता उसे अपने रूप ,ज्ञान ,धन का गुरूर था , परन्तु अपने ही तरह जीव को निचा समझता ,असुंदर , अपने ही तरह आँख ,नाक ,वालो ,को तुच्छ और प्रकृति के ही जीवो से मन ही मन घ्रिडा करता ,तरह तरह के विचार से भेदभाव करता ,

उसके अन्दर के पञ्च देव उसकी सोच विचार का आनंद लेते , तथा उसे सबक सिखाने को लेकर समय देव से सिफारिश करते है |समय देव ,पञ्च देव की बात मानकर उसे भविष्य के लिए दण्डित करते है ,कहते है ,जहा के लोग इसके पैर छुते थे ,अब की बार इससे कतराए गे ,यह रूप से उपरी आवरण से नाम को देखकर ही मन को फेर लेता है ,तो इसका रूप भी प्रभावित होगा ,चूँकि यह सिर्फ रूप ,मान ,सम्मान , ,का ही लोभी है अतः इसका सरीर ही प्रभावित होगा ज्ञान नहीं ,और समय के साथ उसका सरीर प्रभावित हो जाता है ,उसे कोढ़ हो जाता है , use सबक मिल गया था ,

पर आज भी ऐशे कुष्ट लोगो का ज्ञान नहीं मरा है ,एक बार मिलो जरूर कुछ मिलेगा ,आखिर वो भी तो देवो का ही पुत्र था ,पुत्र को दण्डित करते है तो कुछ सिखाने के लिए ,कल जिनको ये अलग और तिरस्कृत समझते थे ,आज ये स्वयं अभिशापित है ,और समाज के घर में ही टेढ़ी नजर के शिकार है ,


परन्तु ज्ञान ,कर्म ,और भक्ति की ताकत का मेल हर राह आसन ही नहीं ,वांछित फल भी देती है ,

भेदभाव रहित होने के लिए .....

छोटा बड़ा सभी को एक ही धरती का अन्न मिला ,हवा पानी धुप छाव का धन्न मिला ,

क्या खता हुई की कुछ ही लोगो से मन मिला ,समय देव ने रच दी रचना मिला भी तो शापित तन मिला ,,,|||||||

धीरे धीरे उसे अपनी गलतियों का अहसास होता है ,वह तप करता है ,बरसात में तो तुलसी की पत्तिया भी धुल जाती है ,तप -पश्चाताप से वह शुद्ध हो जाता है ,वह बासुदेव कृष्ण को दोस्ती की कसम देता है ,मै तेरा सखा फिर भी लोग मुझसे दूर भागते है ,

कृष्ण कहते है मित्र तुम पाटलिपुत्र जावो सूर्य उपासना के तट पर सूर्य सरोवर से लेप युक्त मिटटी बदन पर लगा कर सूर्य कृपा लो ,आतंरिक पवित्रता को वायु देव पहचान कर ,सूर्य देव तुम्हे निरोग कर देगे ,,,,|||||


चलते चलते ....अहंकार वह दानव है ,जो भूख मिटाने के बाद और भी विकराल और शराबी रूप धारण कर लेता है ,

लेखक :- एम् कॉम , २०१० पूर्ण , ,माफ़ी मंगाते हुए .....Ravi kant yadav

शनिवार, 21 अगस्त 2010

सिसकता शहर



हमारा शहर संसार का सबसे प्राचीन शहर है ,या उन शहरों में सामिल है ,सबसे ज्यादा मंदिरों वाला शहर ,धर्मनगरी यहाँ ही आज़ादी का असली मतलब सही मायने में समझा जा सकता है और कोई हमारी आज़ादी छीन भी नहीं सकता ३-४ मीटर की सड़को पर ७ मीटर की गाड़िया चलती है अम्बुलंस और अग्नि समन की गाड़िया खड़े -खड़े सायरन बजाते -बजाते रिज़र्व में आ जाती है ,जाम ऐसा की लंका के सेतु की तरह बन्दर ऊपर ही कूदी मारते हुए अपने लक्ष्य को चला जाता है ,उसे कीचड ,उबड़ खाबड़ ,पत्थर ,पानी भरे ,जलती ,कंकडिली सड़क पर जाने से राहत मिल जाती है ,कुछ दुकानदार ऐसे दूकान खोलते है ,मानो सड़क से ही ग्राहक उठा लेगे ,खडी अम्बुलंस में बच्चा चकपका -चकपका सोचता होगा ये सायरन और भीड़ से लगता है , की पृथ्वी वासीयो का हैप्पी बर्थ डे मनाने का कोई तरीका है ,


गलियों में न जाने कब जर्जर भवन का पत्थर गिर जाये ,या ऊपर से कोई कूड़ा या पानी ही न टपक जाये ,जर्जर तार कभी भी काल बन सकते है ,सीवर ऊपर से बहने की कसम खा चुके है , मोक्ष नगरी में लकडिया पानी से भीगी रहती है ,वजन ज्यादा होगा ,बनारसी ठग मसहूर है , चोर कटो की भर मार है ,पलक झपकते ही लूट लेते है ,
एक एक तीन पहिया ,रिक्शे ,ऑटो ,कई बस में तो इतने बच्चे ठुसे रहते है ,की खूझा भी न सके ,
यहाँ मिनटों में रेडी मेड विजली प्राप्त की जा सकती है , कुछ नहीं बस यहाँ वहा बांस खड़ा किया और काम पूरा ,कुछ लोग के फ़ोन के तार भी बीच से फ़ोन जोड़कर किये जा सकते है ,बिल बदमास नहीं बकायेदार भरेगे ,
उडती धुल ,कड़कती धुप ,कीचड़ ,पानी ,फैले कूड़े ,दौड़ते सुअर , ,गुटखा , पान की रंगत ,आवारा कुत्ते ,आदि इसमें चार चाँद लगाते है ,और प्रेम से साथ निभाते है ,
हम सभी आज़ाद है और आज़ाद आजादी नहीं छिनते ,ये हमारे सड़क ,पार्क ,आदि के साथी है ,
सड़को पर बस घुसते जावो मानो आगे खैरात बट रही हो ,रही बात व्यवस्था और सजगता की तो वह काम प्रसाशन का है ,हम तो सड़क पर बपौती के लिए ही निकलते है ,और गाड़ी बंद कर खूब पेट्रोल बचाते है ,
सड़क और शहर के लिए .....
शहर बना ज़हर ,सड़क की ज़िन्दगी बनी मौत ,
हर तरफ जाम का कहर ,थक गयी आँखों की जौत....

जनता ,सड़क ,प्रसाशन और परेसानी के लिए ...
टूटी सड़के पन-तपन से भीगते लोग ,
चलते भी है ,ऐसे जैसे जनता या सड़को को लग गया कोई रोग
कभी -कभी ऐसा लगता है ,बस सड़क पर ही लग जाये जोग ,
प्रसाशन कहता है ,तू आया सड़क पर इसलिए कुछ तू भी तो भोग

लेखक :- भींड से बचते हुए ........एम् .कॉम .२०१० विद्यापीठ ,वाराणसी ,........ये राही चल चला चल .......

शनिवार, 14 अगस्त 2010

फिर आया ये रास्ट्रीय पर्व आज़ादी का





हमारा देश एक ६४ साल का बुढ़ा देश हो गया है ,कहने को यह रास्ट्रीय पर्व है ,इशलिए विदयाल्वो ,स्कूलों , में मिठाई मिलती है समोसा मिलता है , बच्चे कार्यक्रम करते है ,उन्हें सिर्फ इन्ही सब में खुसी मिल जाती है ,लगभग सभी बच्चे आज़ादी के सही मायने नहीं जानते ,इनाम मिलेगा ,मिठाई मिलेगी ,,ये होगा ,वो होगा ,

टी.वि। पर राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री ,सीना तानेगे ये किया वो किया , तोप ,मिस्साइल , दिखाई जाएगी ,ये होगा वो होगा आदि आदि , सन्देश कही कही नहीं पहुचेगा ,बिजली के अभाव में ,

लेकिन मुझे जो विविधता में एकता दिखती है ,उशी में रोमांच और संतोष मिल जाता है ,

३५ राज्य ,विश्व के लगभग सभी धर्म ,११४ भाषा ,२१६ उप सहयोगी भाषा ,सभी मौसम ,सभ्यता ,संस्कृति ,यही गर्व भी है ,और सर्म भी क्यों की केवल जाति पर ही भेदभाव प्रारंभ हो जाता है ,

इसआज़ादी पर किस राज्य को देश का सबसे प्रगति शील ,या प्रगति प्राप्त राज्य का भारत मणि जो माणिक से बना है ,सम्मान मिलेगा ,पहला ,दूसरा ,तीसरा ,पुरस्कार किशे मिलेगा ,उनके लिए केंद्रीय कोष की वर्षा होगी ,ये किसी को नहीं पता , सी.ऍम। और पी.ऍम। को प्रतिदिन ,४ घंटे देश के विकाश के लिए सभा करनी चाहिए ,

सच कहे तो आज़ादी का मतलब हमें स्वयं नहीं पता ,धूम धड़ाका,नाच ,गाने ,फिर वही दूसरी सुबह ,और यहाँ वहा

बिखरे तिरंगे ,

सच मायने में आज़ादी का अर्थ है क्रांति ,परिवर्तन ,हवा का झोका ,लहर जिससे पूरा देश लहराते तिरंगे की तरह प्रभावित हो .पहला रंग संतरी या केशरिया इनको छीलो या घोलो तब आज़ादी के मायने समझ में आयेगे ,मै रंगों पर नहीं बोलूगा क्यों की यह ध्वज सम्मान और ज्ञान से बढ़कर है ,

एक एक बच्चा भारत है ,हम जो भी हो लेकिन हमारी औकात एक भारतीय से ज्यादा कुछ नहीं है ,और कम तर छोड़ो ...........

इतिहास साबित करता है ,अंग्रेज विद्वान थे ,ईस्ट इंडिया कंपनी १६०० से कार्य कर रही थी और है .....उन्हें मजदूर चाहिए थे और हमें आज़ादी ,इंडिया गेट पर शहीद नाम ,हो या प्रथम ,और दुसरे विश्व युद्ध में शहीद भारतीय ,या नेता जी के साथ भारतीय ,कुछ देश भक्तो ने सब कुछ धन ,सुख ,नीद ,चैन ,परिवार को छोड़ केवल आज़ादी और मौत को चुना ,सायद वो अब सरीर से हमारे साथ नहीं है ,जिनकी आज सख्त जरुरत है ,

उपनिवेशी साबित क्या करना कहते थे ,अंग्रेज जाते जाते रेल ,सड़क,बिजली ,पानी,आदि का तोहफा दे गए ,

धन सम्पदा ले गए ,और अत्याचार से आनंद भी ले गए ,और पीछे एक गरीब देश के साथ पकिस्तान का भी बटवारा कर गए ,वो साबित क्या करना चाहते थे ? आज भी हमें हमसे ज्यादा हम नहीं वो अंग्रेज जानते है ,सायद कहते हो जिन्हें होना चाहिए ,,वो नहीं रहे .....या कुछ और ...

हमें स्वयं पर निर्भर होना होगा ,कोई आपको सांसे उधार दे सकता है ,रक्त भी दे सकता है ,पर दिल की धड़कन और प्राण तो नहीं दे सकता न ...........

देश प्रेम दिल और रक्त में बसता है ,..........जो धडके और प्रवाहित हो .............

इतिहास हमें सिखाता है ,विकशित वही है ,जो भविष्य देखता है ,आज भी हम आज़ादी का सच्चा अर्थ नहीं समझेगे क्यों की हमारे पास दिल ,दिमाग ,खून ,है तो अपने नाम ,पैसे ,इज्ज़त ,सोहरत के लिए ,

नहीं दम है तो अग्रसारित क्यों नहीं करते , एक पौधा ही वृक्ष बनता है ..............

एक सायर की पुरानी सायरी ..........शहीदों की चितावो पर लगेगे हर बरस मेले -वतन पर मर मिटने वालो का बाकि यही निशा होगा

भूत और वर्तमान के लिए ।

हे भारत के भक्ति आराधक ,

विकशित देश के तुम हो साधक

देश भक्तो के लहू का मान रहे ,

विश्व भर में भारत का सम्मान रहे .........................

प्रेषक ...... ऍम .कॉम। २०१० ....विद्या पीठ वाराणसी .....पैन नेवर एंड्स ....दर्द कभी समाप्प्त नहीं होता

गुरुवार, 27 मई 2010

उड़ते सपने -टूटते लोग भाग - 1














































अभी -अभी हाल ही शनिवार २२ मई २०१० में एयर इंडिया का विमान लैंडिंग के वक्त दुर्घटना ग्रस्त हो गया ,१५८ मारे गए कुछ रिश्ते वाले, कुछ पैसे वाले ,और कुछ परिश्रम करने वाले ,प्रशासन से ,लैंडिंग रन वे के आगे स्विमिंग पूल नहीं बना सकते तो ,लैंडिंग रन वे एवेरेस्ट ,अरावली ,और अन्य पहाडियों पर बना लो और उसमे मंत्री महोदय को बैठा दो और ओवर शूट -ओवर शूट का हल्ला मचा दो ,




सरकारी मतलब घर की तरकारी ,हर उड़ान पर ट्राइल ,चेक्किंग ,तो होगी नहीं ,सरकारी मतलब आराम के साथ काम ,निजी मतलब यहाँ काम घर पर आराम ,




अब क्या करे सारे सिस्टम में ही जंग लग चूका है ,हमारे पडोसी देश चाइना को ही ले ओल्य्म्पिक को पीछे छोड़ते हुए ,कहा से कहा पहुच रहा है ,हम वही है और रहना भी चाहते है ,क्यों की जो पुराने से चिपका रहेगा नया नहीं सोचेगा और पसंद भी नहीं करेगा ,जब तक वो फिर पुराना न हो जाये ,




हमारा देश गरीबो का देश कहा जाये तो कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी ,हमारे देश के निर्माता जवान ,किशन और शिक्षक है ,इसलिए जय जवान ,जय किशान और जय ज्ञान दान ,स्वयं शिखो ,ज़रूरत को शिखावो जो कुछ ज्ञान है ,दे दो ,




अभी अभी सर्वर की वजह से मेहनत पर पानी फिर गया ,


इसलिए कह गए कई महान पढो ,पधावो ,बाटो ,ज्ञान पावो सुख सम्ब्रीदी और सम्मान ,


जहा दिन सुरु होने पर रात का खाना और रात में दिन के खाने के लिए सोचना पड़ता है ,


तो क्या एक बच्चा पढने क्यों और किसलिए जायेगा ,तो उसे लालच दो ,ख़राब खाना दे कर सेहत मत बिगाड़ो ,उन्हें पैसा दो ,प्रवेश हेतु पिता से ओटल कार्ड लो ,


जहा खाने को नहीं अटता वह क्रायोजेनिक के चक्कर में १८ साल की MEHNAT AUR अरबो रूपी बर्बाद या पैसा गटक कर प्रयोग ही विफल बता दिया गया है ,इसे औसत के आधार पर बार -बार खिलौना बना कर प्रयोग क्यों नहीं किया गया ,क्या मॉडल ,डिजाईन ,सही था ,भगवान् जाने एक छलांग के चक्कर में ज्यादा मरना होता है ,जोखिम जो है ,जोखिम कम ही सही है ,क्यों की अधिक जोकिम सही नहीं ,होती ,


इन नकारा वैज्ञानिको को निकालो ,देश भक्त लावो ,


इसरो सिर्फ धन के लिए रो जहा भुकमरी है ,


हर विभाग का पैसा विभाग के लोगो और विभाग के देखभाल से ही नहीं पूरा होता ,उन्नति क्या खाक होगी ,


जलनिगम ,रोड को रोड वाले नगर निगम को ,नगर निगम वाले दूरसंचार को ,दूसंचार वाले ,जल निगम को ,जल निगम वाले ,विधुत्कीय को विध्हुत वाले वन व्हिभाग को वन भिव्हाग वाले रोड और विद्धुत विभाग को ही दोष देगे ,


टीम का मतलब ही होता है ,एक गलती एक बहार ,टीम में गलती और गलत आदमी के लिए जगह नहीं होती ,


कुछ नियोजित होता है ,कुछ ,सुनियोजित ,हर विभाग अपने कार्य का इन्सुरांस क्यों नहीं करा लेता ,


और दोष के लिए कोई नहीं मिला तो भगवन को भी दोष देने में सान होती है ,


रही बात हर विभाग के संगतःन के नए लोगो की तो कुछ २-३ साल में मोटा जाते है ,चर्बी जम जाती है ,


हबोकना सुरु ,देखा देखि साफ़ पाक लोग भी लिप्त हो जाते है ,


मान के पेशे में भी हबोकना सुरु हो जाते है ,मेरे क्लिनिक आ नहीं तो मर ,


मेरे कोअचिंग आ नहीं तो तू इशी क्लास में रह ,


मानो भूत का डर दिखा रहे हो ,अरे ये है वो है , आदि


एक माने जाने हॉस्पिटल में किडनी देने वाला और लेने वाला मर जाते है , क्यों


पोलिसे वाले केवल पैसे की भासा समझते है ,पैसा लेकर वाहन आगे जा कर किस्सी की जान भी ले सकता है ,एक बार एक पूल ही दह गया ,


गरीब ,लाचार को ऐसे दान्तेगेजैसे खौराह्वा कुत्ता हो ,


प्रधान मंत्री के यहाँ से चला धन ,ग्राम प्रधान तक आते आते १००-से ३३% ही बच जाता है कमाल की बात है उतने में ही रोड टका टक बन कर तैयार भी हो जाता है ,


किसी के पास खाने को नहीं ,किसी के पास पढने को नहीं ,किसी के पास इलाज़ को पैसा नहीं ,पैसा वाले है तो किस्मत कहा ले जाये पता नहीं ,क्यों की कभी कभी लाख कोसिस बाद भी लहरे और हवाए किस्ती को दूर GANTABYA SE DOOR KHICH ले जाती है ,


पता नहीं राजा बेटा पढ़ेगा जा पैसे से मस्ती लेगा ,या घर को ही छोड़ कर कही बस जायेगा ,


इस देश में आयकर विभाग से लेकर सी .बी। आई । तक बिकने के मौके भुनाने को नहीं जाने देती ,


जनगणना तो हो रहीC है किस घर में एक टाइम चुल्ल्हे नहीं जलते ये गिनती नहीं होगी ,


मुस्लिम धर्म में भी आमिर है तो खूब है गरीब है तो हद है ,सायद इसलिए भटक जाते है ,आज संगीत गायकी में ८०% इनकी आवाज़ भाती है मै मर जा उगा पर अपने वालो को बचा लूगा यही इस्लाम धर्म है ,इसमें अलग और सर्वोपरी केवल मासाहार त्यागने वाले ही अलग धर्म बना सकते है ,मार पीट हमारी परंपरा नहीं है ,अँगरेज़ लाये थे छोड़ गए अब डब्लू डब्लू ऍफ़ या ई से शिखा रहे है ,


यहाँ शेर मेमने से विपरीत जल धरा के बाद भी पूचता है ,तुने मेरा पानी क्यों जूठा किया ,


अब इस का उपाय आप ही बतावो , हां अलग अलग जबाब मिलेगे


संसद में कुछ लोग फिल्म देखने से ज्यादा रील बदलने का इंतज़ार करते है ,


ये नेता लोग तो अफीम और धतूरे के फूल है ,


हमारे देश में आज भी आनाज के खेतो से आनाज काटने के बाद कुछ लोग आनाज उठाने को झाड़ू लेकर पहुच जाते है ,मै सोचता था आज के लिए शिक्षा ,चिकित्चा ,और रोज़गार आवअसक है ,ज़रूर मिले ,पर जहा रोटी कपड़ा और मकान के ही लाले है ,तो ये कहा तक संभव है ,जब चूल्हा चौका बर्तन ही न हो तो खाना कैसे बने ,ठीक यही हाल गरीबी और गरीबो में बिजली और बिजली की स्तिथि है ,भिखारियों को सचल पसु बंदी की तरह पकड़ो और मोमबत्ती के कारखाने में भेज दो ,......अब गूगल पर नहीं लिखुगा इसी नाम से ट्विटर पर हु ........मेरा पुराना अकाउंट चोरी हो चूका है , सब कुछ ट्विट्टर पर ब्लॉग से ......ज़िन्दगी रही तो मिलते रहेगे .......क्रमशः ................

शनिवार, 10 अप्रैल 2010

प्रशंसा










आज २४ अप्रैल है ,भारतीय हीरो सचिन तेंदुलकर का जन्म दिन है ,वे ३८ साल के हो जायेगे ,इंडिया टी.वि । किसी काम तो आया ,२० साल के खेल में सचिन के पास सब कुछ है ,वही आत्म विस्वास ,नियंत्रण ,छोटा कद ,गुन्घ्राले बाल ,और वही तेज़ दौड़ ,लेकिन पहले की अपेक्षा खेल में कभी कही फूट वर्क की कमी महसूस होती है , लेकिन आश्चर्य धोनी स्ट्रा इक देते तो २०० रन भी कम पड़ते ,
उन्हें चोट नहीं लगानी चाहिए ,उन्हें दुःख दर्द न हो ,वे ४५ के उम्र तक खेल सकते है ,सौरव से उम्मीद थी की वे अपना सन्यास जोरदार विस्फोटक पारी से करे लेकिन निरासा हुई ,वे खेल सकते थे ,
सचिन वर्ल्ड कप जिताना चाहते है ,भारतीय खिलाडियों को उनका साथ देना होगा ,सतर्क रहना होगा ,चौतरफा ध्यान देना होगा ,भर पाई ऐसे ही होती है ,डरना नहीं होगा ,दबाब में बल्ला न थामना ,फुर्तीला होना होगा ,अपने ऊपर बिस्वास करना होगा , jokhim में अपना विकेट बचा कर रखना होगा ,उछालती गेंद चालाकी से खेलना होगा ,अपने गुण को दिखाना होगा ,जो लिखा हु वो न बनो जो हो वो बनो ,बाल को ताकत से दिशा देखकर और दिसा में भेजना होगा ,और हवा के शाट देखकर या नहीं खेलना होगा ,बोल्लर विपक्षी को एक एक रन को तरसा दो ,चौका गया कोई बात नहीं ,ये बाल अगली बार बल्ले बाज़ छु भी नहीं पायेगा ,विश्व कप हमारा होगा ,याद रहे ब्रम्हांड में चतुरता ,चपलता ,ताकत ,सहन शक्ति ,साहस , को सामान को छोड़ कर कोई नहीं हरा सकता ,
जी तोड़ परिश्रम ,प्रयास ,से श्री गणेश और माँ सरस्वती का आशीर्वाद बना रहता है ,
कर्म ,धर्म ,यादे ,साथी ,भटकतो के लिए चार पंक्तिया
धीरे धीरे पल, दिन ,महीने,गुजर जाते है ,
कोई राह बनाता है ,तो कई थक कर ,चल ,कर मंजिल पहुच जाते है ,
मिट ता कुछ नहीं ,पर बनाने वाले ही मिट जाते है ,
vaah रे प्यार राह से ,ये राह भी अजब है,उस पर चलने वाले भी बढ़ते ही चले जाते है ,
आइये जानते है आराध्य देव श्री गणेश को ,
श्री गणेश जो बुद्धि के देवता है ,वे खुसी और प्रसंशा में बसते है आप के साथ रहते है ,उनका कार्य अपने सूड़ की तरह सभी देवतावो व उन्हें प्रोत्साहित कर शक्ति बढ़ाना और प्रोत्साहित कर उनकी शक्ति में निखर लाना होता है ,वे एक सच्चे प्रसंसक है ,जो अच्छाई की जम कर तारीफ करते है ,ताकि वे अच्छाई का साथ न छोड़े ,वे सभी देवतावो के कार्य गुण की तारीफ़ ,सम्मुख करते है ,तथा उनके भक्तो को मिलाते है ,अपने भक्तो को राह दिखाते है ,सभी देवतावो के आशीर्वाद ,सफलता, स्वरुप आशीर्वाद के रस्ते को प्रसस्त करते है ,
तथा खुसी को नजर न लगे इसलिए विघ्न विनासक भी है ,
सभी देवतावो को प्रोत्शाहन उर्जा प्रदान करते है ,इसलिए सभी देवता के रूप में गढ़ है ,
एक बार वे श्री कृष्ण से भी मिलते है ,मिलते ही गुण गान ,प्रसंसा ,अपने ल य में थे ,श्री गणेश श्री कृष्ण की तरफ देखते है उनके मन चेरे पर कोई कोई भाव या खुसी नहीं थी ,कोई उर्जा का संचार नहीं कर पा रहे थे ,
श्री गणेश कहते है ,प्रभु मै ने यह बहुत कम ही देखा है ,लगता है सभी देव्तावो के आशीर्वाद लेने के पश्चात आप का नहीं मिल पायेगा ,श्री कृष्ण भाव विभोर हो जाते है ,
कहते है मुझे कुछ नहीं आप की मित्रता चाहिए ,
अब श्री गणेश भाव भिह्वल हो जाते है कृष्ण ,श्री गणेश से कहते है ,आप बहुत खूबसूरत है और अपनी प्रिय मोर पंखी श्री गणेश के माथे पर अलंकृत कर देते है ,
इस तरह श्री गणेश श्री कृष्ण के प्रसंसक ही नहीं मित्र भी बन जाते है ,मित्रता से दोनों एक दुसरे के प्रसंसक बन जाते है ,
तो आज इश्वर ने हमें एक और नया दिन दिया उसका धन्यवाद करे नायको की सच्ची प्रसंसा करे और सच्चे मित्र तलासे ,
कर्म ,मधुरता,और आशीर्वाद के लिए
बजी जो बंसी स्वरों ने सलाम किया ,
होठो को रोका पर सांसो ने नाम लिया ,
अजब दिया भी ऐसा की कुछ भी न लिया ,
कोई बता दे ये ,प्यार है या प्रतिभा लगे सारा जहाँ पा लिया ,
वैसे प्रसंसा वह एक औसधी है ,जो समय के साथ चलते रहने पर विष बन जाती है ,
दोस्तों चिपके रहो मेरे ब्लॉग से,
हो सके कुछ मिल जाये आप के भाग से ,,
इंडियन ........म.गा.का.वि.पि। २०१० एक खोया व्यक्ति ..................म.कॉम.2010

गुरुवार, 11 मार्च 2010

डर

पंडित वीर भान मिश्र एक शांत धर्म कर्म में रूचि रखने वाले ४१ वर्षीय व्यक्ति थे , प्रतिदिन अपने घर के पास मंदिर जाना उनकी दिनचर्या थी , जिससे उनको चैन मिलता था ,परन्तु गृहस्त जीवन से उन्हें कुछ दिन के लिए सहर जाना पड़ा ,उनका दिल यही मंदिर पर अटक रहा था ,तो उन्होंने बड़े मनोयोग से अपने पुत्र छोटू को पूजा का दायित्य सौपा ,वो अपने पुत्र को पूजा पाठ का सामान देकर ,कहा बेटा ये थाली अक्षत मंदिर में पूजा कर आना और ये दूध का भोग भी भगवानको जरुर लगा देना , छोटू एक नौ वर्षीय अबोध बालक था ,पिता की इच्छाके अनुसार वह मंदिर जाता है ,अपने तरीके से पूजा पाठ करता है ,अपनी पूजा पाठ से संतुस्थ वह वापस लौटने को होता है ,तो उसकीनजर दूध के कटोरे पर गयी ,अरे भगवान ने तो दूध पिया ही नहीं ,फिर वही बच्चा हठमान ,मनौवल ,१० मिनट बाढ़ भी भगवान दूध नहीं पीते है ,तो अथक परिश्रम बाद छोटू को क्रोध आ जाता है ,छोटू कहता है ,भगवान जी कह रहा हु न ,ये दूध पि लो नहीं तो मुझसे बुरा कोई न होगा ,अब क्या मजाल कोई कैसे न माने पलक झपकते ही भगवान आकर दूध का कटोरा खाली कर देते है ,आधे घंटे तक बच्चे से खेलना मान मनौवल के बाद अब बारी भगवान की थी ,परेसान हो कर बोले छोटू अब मुझे जाने दे ,छोटू ने भी sart रख दी ,अब दूध पिने में देरी न करना ,और यह सिलसिला छोटू के पिता के आने तक सात दिनों चलता रहा ,....... अतः बच्चो की जिद ही उन्हें बनाती और बिगाड़ती है ,उन्हें दूध का कटोरा जमीन से उठा कर स्वयं दूध ग्रहण करने की योग्यता विकशित करनी चाहिए ,अतः जिद का कारन जानने से उन्हें सही मार्ग दरसन किया जा सकता है ,अगर आप जिद्दी है तो आप में बहुत उर्जा है ,जिद्दी महान खिलाडी भी बन सकते है ,अधिकतर खिलाडी अनाड़ी हो सकते है ,और अनाड़ी खिलाडी साबित होते है ,बच्चो को बताये कैसे कमल कीचड़ में रह कर wahaa से उर्जा लेकर खिल कर फूल बन जाता है ,उसी तरह दिल की उर्जा को दिमाग तक ले जाये गन्दगी निचे रह जाएगी ,जल भी तो इसी प्रकार सुद्ध होता है ,विचार अच्छे हो तो अच्छी चीजे प्राप्त होती है ,बच्चो हा बच्चो की आवाज़ और तड़पती इच्छा को सुन लो ,दिल से छनकर जो विचार दिमाग तक जाते है अच्छे होते है ,माता की कृपा इन्हें मिलती है ,यहभी सिद्धि है , अनायास ही यह गौतम बुद्ध को प्राप्त हो गयी थी ,उनके जिद को भी एक माता देवी ने तोडा ,व ज्ञान दिया , श्री कृष्ण की शक्ति भी इसी से बनी ,