गुरुवार, 25 फ़रवरी 2010

सच्चा सचिन




सचिन का मै पुराना प्रसंसक हु , सायद मै पहली बार क्रिकेट देख रहा था , तब से ,खेल में बाल कहती है आप जहा भेजे बासऔर इसी तरह प्यार से भेजे ,गज़ब का कांफिडेंस और नियंत्रण मेरे ऊपर भी क्रिकेट का नसा चढ़ा और क्रिकेट के लिए हलुवा और समाज में कलुवा बन गया ,मै यहाँ क्रिकेट पर कुछ नहीं बोलूगा ,क्यों की ये पूरा पन्ना सचिन रमेश तेंदुलकर का है ,यदि भारत में क्रिकेट धर्म है तो सचिन उसके देवता है ,सर्जाह अकेले फतेह और शेन वार्न की धुनाई से लेकर सचिन अकेले थे ,और आज भी है जो ,नीरस दिन को भी होली दीपावली बना देते है ,एक समय ऐसा भी आया जब सचिन आउट होते थे तो लोग टी.वि । बंद कर देते थे ,आज भले ही भारत न , १ है ,परन्तु मैक ग्रथ और मुरली धर जैसे बोव्लर की कमी है ,एक रन नहीं बन्ने देता और दूसरा विक्केट के साथ रन रेट पर भी अंकुश लगाता है ,बोवलर की कमी को भारत के अब तक के सबसे ताकतवर बल्लेबाजों ने ढक रखा है ,ये वही सचिन है ,जिसके लिए पूरी विपक्षी टीम केवल सचिन के विक्केट के लिए खेलती थी ,और विक्केट लेकर ऐसा नाचते है जैसे मेढक को विज्ञानं कक्षा में रखते है ,या ऐसे कुदेगे जैसे कोई कर्रेंट लगा हो ,सचिन अब बाउंसर पर जरुर मुस्कराते है ,पाकिस्तान को लौट कर मुह तोड़ जबाब देते है ,और उनके विचारो को भी सुद्ध करते है ,कई देश केवल उन्ही को देख कर पिच तक बनवा देते थे ,कभी कभी वो ऐसा खेल खेलते है मानो बल्ला गन हो और चारो तरफ केवल नॉन स्टॉप धुल और धुवा हो , वे बेसक क्रिकेट के देवता और भारत रत्न के गर्व से हक़दार है ,एक भारत तीय होने के नाते मै ,मै उन्हें इससे बड़ा सम्मान पाते देखना चाहता हु ,सचिन का अपने बल्ले से प्रेम उनकी क्रिकेट पूजा को दर्शाती है , वे सदैव रन के भूखे रहते है ,और अपने विक्केट के अमुल्यता को बनाये रखने की कोसिस करते है ,वे प्रथम २, ४, सीढियों के मूल्य को पहचानते है ,वे क्रिकेट के लिए समर्पित है ,सचिन पर उठने वाली हर उंगली स्वयं में टेडी है , वे कितना ही मैच अकेले जीता चुके है , और भारत के सम्मान की रक्षा की है ,यही नहीं कई मैच में अपने बवलिंग से भी करिश्मा किया है , आधी टीम को अकेले ही छुट्टी कर दिया है , लेकिन हम आज भी उनके दो ओवर देखने को तरस जाता हु ,कल्लिस की क्या औकात है ,सचिन के सामने ??,हम खुसनसीब है ,जो उनको खेलते हुए देख रहे है ,वो अपने आप में भारत के गर्व है ,उन्होंने एक अच्छे महान खिलाडी को निर्माण एक ,अच्छे व्यक्तित्वों के साथ रखा है ,वे अपने गुरु जी का आदर सम्मान और गरिमा गान करते है ,इश्वर की शक्ति को पहचानते है ,और उसके सन्देश को दिल से निभाते है ,और कर्म ही पूजा है का सन्देश देते है ,वो रिकॉर्ड बनाने के लिए नहीं खेलते ,रिकॉर्ड उनको नमन करने के लिए बनते है ,सचिन देश की सीमा पर विराजमान हमारा विजय ध्वज है ,उनका वास्तविक कद बल्ला उठाये सूरज की चढ़ती धुप से बन ने वाली परछाई है ,जिसका वजन उनके पैर है ,उनका अहंकार जमीं पर सरक कर वो भी इस मुकाम और उम्र में फील्डिंग जितना है ,कहते है प्रसंसा अगर ................. लेकिन मै नहीं रुकुगा , मै तो कहुगा उन्हें भारत में एक बार मैन ऑफ मैच में मराठी भी बोलनी चाहिए , दिल का प्यार दिमाग को ही सही नहीं करता बल्कि पवित्र भी होता और पवित्र भी कर देता है ,और दिमाग का प्यार रोग ही फैलता है ,

यदि सचिन का रिकॉर्ड कोई तोड़ सकता है ,तो वो केवल कोई गणपति भक्त अन्य सचिन ही तोड़ सकता है ,जिसकी खुसी सचिन रमेश तेंदुलकर को भी होगी ,और सचिन वही हो सकता है ,जो जितने और जिताने के लिए खेले सच्चे सचिन के लिए ...........

जय भारत के वीर महान ,

क्रिकेट के आन ,बान और शान

भारतीय जनता के दिलो की जान ,

सर्व शक्ति गणपति का जिन्हें है ,भान


श्री कृष्ण सरन म मम: मम :,

सचिन रमेश कभी आये मेरी गली तो स्वागतम स्वागतम ,स्वागतम ,


आवो एक बार देश के लिए और सचिन के लिए बोले ,

ॐ लम्बोदर ,गजानन ,गम गणपति,सिद्ध विनायक नमो नमह :


इंडियन अ लोस्ट पर्सन........म.कॉम। म .गा.का .वि. पि .विस्वा विद्यालय वाराणसी ......२०१०.......




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