Tuesday, September 21, 2010

हम हमारा दिल और न्याय





















दोस्तों मंदिर मस्जिद पर बहुत गन्दगी और राजनीति हो रही है ,इसलिए आज फिर इंडियन आप के साथ है ,चूँकि हमारा देश ,सभी धर्मो वाला देश है ,५ प्रमुख धर्म ,

हिन्दू ,मुस्लिम ,सिख ,इसाई ,बौद्ध,और जैन ,

जानते है मेरा नजरिया क्या है ,

इस्लाम ; - नियमो पर रहकर ही साफ़ पाक अल्लाह का प्यार पाया जा सकता है ,यही एक राह अल्लाह के पास ले जाएगी ,....


सिख ;- अपनी जड़ो को न त्यागो ,वृक्ष की तरह महान बनो ,वृक्ष बनो ....


बौद्ध ;- अपना दीपक स्वयं बनो ,कोई भी सदा साथ नहीं होता , ईश्वर भी ...


जैन ;- सभी जीव जंतु समान है , सभी जीव जंतु समान है , सभी में एक ही प्राण उर्जा होती है , अन्यथा किसी की कोई अहमियत नहीं ......


हिन्दू ;-हिन्दू धर्म में सबसे ज्यादा धार्मिक, वेद, पुराण, है ,इसलिए ये थोड़ी लम्बी है , ;- हिन्दू के आखिरी देवता श्री कृष्ण कहते है ,सभी राहो की एक मंजिल है ,प्रेम ,सभी नदिया सागर में ही मिल जाती है ,प्रेम का पलड़ा हमेसा भारी होना चाहिए ,जहा प्रेम नहीं वहा कुछ नहीं कुछ नहीं , राजा शिवी बनो आँखों पर पट्टी हो ,दिल पर हाथ हो ,


चाहे इन्द्र कबूतर हो या अग्नि बाज़ ,और एक महर्षी दधिची भी थे ॥

दिल की पवित्रता पहली और आखिरी दरवाजा है ,...भला काला दिल कौन चाहेगा ,


हिन्दू धर्म में मंत्रो ,यज्ञ का आज के विज्ञानं युग में यही अवधारना है की सरीर और वातावरण को वैज्ञानिक लाभ मिलता है , यज्ञ सामग्री ,अग्नि से वायु से शरीर ग्रहण कर स्वस्थ्य रहता है ,

अग्नि ,हवा ,और मंत्रो के उच्चारण से सरीर पर प्रभाव पड़ता है ,

एक हिन्दू वर्ष में २५० व्रत पर्व है ,यदि आप आत्म ज्ञान और तप करना चाहते है ,तो इसे सभी को धारण कर सकते है , परन्तु आप अन्दर स्वक्ष और पवित्र है , तो वही पूर्ण है ,

क्यों की आप एक जल से भरे या खाली घट को और खाली या भर नहीं सकते ....इसा ई धर्म में शाम को एक मोमबत्ती जला कर प्रभु यशु से माफ़ी और प्रार्थना माँगना ही काफी है ,

परन्तु दिल दिमाग एक पवित्र होना चाहिए ,

श्री कृष्ण कहते है ,सभी तीर्थ व्यर्थ है , जब तक आप दिल ,दिमाग से पवित्र न हो , एक संत रविदास जी ने भी कहा है ;-मन चंगा तो कठौती में गंगा

एक कमल पुष्प का जन्म कीचड़ में होता है ,पर पुष्प देव स्थानों पर प्रिय होता है ,

हल्की हवा के झोंके से भी लाख कोसिस बाद भी आँख में धुल तो पड़ ही जाती है ,किसी का जीवन पूर्णतः सुद्ध नहीं होता ,भगवान का भी , अतः छोटी मोटी गलतिया फिर न हो और ईश्वर से अज्ञानता के लिए माफ़ी से ही सज्ज़न पुरुषो को क्षमा दान मिल जाता है ,



न मंदिर बनावो न मस्जिद बनावो एक देश जो मंदिर -मस्जिद जैसा हो

अतः सभी धर्मो का रस -सार -तत्वा एक ही है ,प्रेम ,प्रेम से याद आया एक कवी सायद कबीर जी ने कहा है ...पोथी पढ़ पढ़ जग मुवा पंडित भया न कोए .ढाई अक्षर प्रेम के पढ़े सो पंडित होए ...

अच्छे प्रेणना ,पुण्य ,प्राण , की रक्षा धर्म है ...इनके दुश्मनो का नहीं ...


भूख -प्यास -दुःख -दर्द - संसार का नियम है ,

सभी को एक दिल ,दो आँख ,कान ,नाक ,हाथ , पैर है ,और सभी को मरना भी है ,

मकान आधार -नीव पर निर्भर करता है ,अगला जन्म इशी जन्म पर निर्भर करता है ,कुछ लोग गिरते चले जाते है ,और कुछ चमकते ,

क्रोध-इर्ष्या शैतान का वह दूत होता है ,जो स्वार्थ सिद्ध कर गर्व से चला जाता है ,और पीछे अपना सुराग तक नहीं छोड़ता

५ प्रमुख धर्म है ,तो ६ विकार maane जाते है ,

शैतान को रोकने के लिए अभी अनेक धर्म बनेगे जो इन्ही धर्म के बीच रहता है ,....... और रहेगा ॥


जाते जाते दोस्तों हमारे देश को एषा बना दो की ५-६ धर्म ही नहीं दुनिया का हर धर्म का नागरिक यहाँ भारत में आये बिना अधुरा समझे ,और हिनुस्तानी बनने आये क्या आप उशे भारतीय बनायेगे ??

क़द्र अच्छे इंसानों की हो ,धर्म की नहीं ........प्रथम प्राथमिकता सदा पैसा नहीं प्यार होना चाहिए ,क्योकि इंसान से ही पैसा है .पैसे से इंसान नहीं है ,सत्य ,धर्म ,ईमान , से बड़ा पैसा नहीं है ,

प्रसंशा भूख ,अहंकार , पतन के रास्ते है ...जब भी हमारा अहम् हम पर भारी होने लगे सोचो हम एक जन्म लेने वाले छोटे अबोध बालक है ,


मनुष्य स्वभाव व आत्म बोध के लिए ;-

विधाता ने बनाया एक खिलौना ऐसा जिसने अलग अलग धर्म दिया ,

जलता रहा वह अलग अलग आग से इसलिए अलग अलग कर्म दिया ,

पर वह कर गया एषा की खुद खुदा को भी शर्म दिया ,

सब कुछ ख़त्म हुआ ,बहुत देर हुई तो kahi जाकर सज़ा के लिए ईश्वर ने थोडा सा मर्म दिया ,,,,,,,,


एक बार फिर जानते है ,सभी 6 धर्मो के ज्ञान ,पवित्र पुस्तकों को ,


हिन्दू ;- धर्म में चार वेद , ऋग्वेद ,सामवेद ,यजुर्वेद ,और अथर्वेद है ,तीन पुराण है , ब्रह्मा पुराण , विष्णुपुराण ,और शिवपुराण , इनके अंतर्गत २० पुराण है ,

और भगवान श्री कृष्ण द्वारा ज्ञान भागवत गीता है ,


मुस्लिम ;-इस धर्म की पवित्र ज्ञान पुस्तक है ,कुरान ,हदीस जो मोहम्मद जी रहीम जी ने दिया है ,


सिख ;-इनकी पवित्र पुस्तक गुरु जी द्वारा गुरुग्रंथ साहिब है , बाबा गुरु नानक जी पूजनीय है ,


इसाई ;- इनकी पवित्र पुस्तक बाइबिल है , प्रभु यसु पूजनीय है ,


बौद्ध ;- इनकी पवित्र ज्ञान पुस्तक धम्म ज्ञान के अधीन त्रिप्तिका (तिपितिका ) है , इनके दाता पूजनीय भगवान गौतम बुद्ध है ,


जैन:- इनकी पवित्र पुस्तक कल्पसूत्र ज्ञान कहलाता है , इनके भगवान महावीर है ,


इन किताबो की पहले भी आवासयक्ता थी और आज भी ज़रूरत है ,क्यों की इनके योग्य ब्यक्ति आज भी कम है , ज़रुरत से मतलब इनके ज्ञान को आचरण में लाने से है ,और कम होते जा रहे है ,.................................

इन पवित्र किताबो में केवल ज्ञान योग्य अच्छी बाते है , बुरे कार्य न करो ,,,,

किन्तु किसी में सज़ा नहीं है ,कि ये सजा दो वो सजा दो ,.........क्यों , क्यों कि इनका मकसद है , हमें राह दिखाना एक अच्छा समाज बनाना , इसलिए न गलत करो न होने दो ,

मेरा एक धर्म है ,मानवता और एक जाति है ,अहसास ,


एक बार फिर न मस्जिद बनावो न मंदिर बनावो एक देश बनावो वो मंदिर मस्जिद जैसा हो ........


लेखक ;- जान लड़ा कर .......मिलते रहेगे यदि सब अच्छा हो ......एम् .कॉम। २०१०























No comments:

Post a Comment