Monday, May 30, 2011

बाहर की तू माटी फांके ....(संगीत ) गोपी

नशे की विनाशलीला





इस बार विश्व तम्बाकू निषेध दिवस ३१ मई को है ,दरसल नशा हम नहीं नशा हमें खाती है ,शराब हम नहीं शराब हमें पीती है ,क्या आप जानते है ,आप जो नशा करते है ,वो आपके किसी एक अंग पर अपना कब्ज़ा कर लेती है ,जैसे शराब ये लीवर को नास कर देती है ,यदि आप अच्छे खासे स्वस्थ्य है ,आपको अपना खुरापात करना है ,अपने को बीमार करना है तो नशा करना प्रारंभ कर दे ,एक सिगरेट हमारे फेफड़े ही कमज़ोर नहीं करता ,हमें कमज़ोर कर कैंसर की तरफ भी ले जाता है ,कैंसर का पूर्ण इलाज नहीं है , तड़पती मौत पक्की ,एक सिगरेट से आपका 5 मिनट जीवन कम हो जाता है ,गुटका जिस तरह गन्दगी -तेजाब से सड़ गल कर बनता है ,आपको उसी तरह बना देता है ,शरीर सड़ने लगता है ,कैंसर बन जाता है ,
भाँग दिमाग कमज़ोर करती है ,पान दात और स्वाद तंतु गला देता है ,खैनी पाचन क्रिया नाशककर देती है , जो भी हो ये नशा हमारी आदते ही नहीं हमारे दिल , दिमाग,हड्डी ,खून ,आँखे ,बाल ,स्वाद ही प्रभावित नहीं करते बल्कि कैंसर ,दमा,लीवर सिरोसिस ,यहाँ तक की होने वाले बच्चे भी प्रभावित होते है ,तथा आदि अनेक छुपी बिमारिया भी हो जाती है ,बीमारी बुलाना है ,तो नशा करिए ,धीरे -धीरे आप इनके गुलाम हो जायेगे और फिर नशा आपको खाने लगेगी ,शौक कभी सस्ते नहीं होते ,ध्यान से बचकर सख्ती से फ़ेंक दो इन्हें ,| वास्तव में आपकी जिंदगी नरक हो जाएगी ,इसलिए नशा करो ,क्योकि स्वास्थय ही धन है ,पर धन कभी स्वास्थय नहीं हो सकता ,
नशे के लिए ...
नशा नाश है ...
शरीर का ह्रास है ...
गले की फास है ...
नशा नाश है ,विश्व का विनाश है ,,|
विश्व भर में २००० फल है ,फल मुख्यतः प्रकार के होते है , कंद (जड़ ) वाले फल , पेंड के फूल से उत्पन्न और सूखे फल , कहते है जैसा आहार वैसा व्यवहार अर्थात जैसा अन्न वैसा मन,आहार में मुख्य तीन वर्ग रखा गया है , जिस प्रकार तंत्र ,मंत्र ,और यन्त्र है ,उसी प्रकार तामसी ,राजसी ,और सात्विक आहार होते है ,जिससे सात्विक से स्वस्थ्य तन का ही नहीं पवित्र आत्मा का भी निर्माण होता है ,
एक हाथी और एक शेर अंतर है ,सरीर का नहीं आहार का ,|
यह भी है की अलग -अलग जगहों का अलग -अलग आहार है क्यों की यहाँ के मौसम के अनुसार वहा का भोजन निर्धारण होता है ,जो मौसमी प्राकृतिक मार से शरीर को संतुस्ती ही नहीं बचाव भी करता है ,पर वे सभी भोज्य वस्तु जो प्रतेक जगह स्वीकार है ,वो सर्वोत्तम कहलाते है जैसे दूध -और शाकाहार ,
हमारे भारत में जो विविधता और लज्जत मिलती है ,वो प्रतेक राज्य अनुसार अलग -अलग है ,|
प्रतेक राज्य की अपनी वेश -भाषा-नृत्य और व्यंजन आहार है ,| भोजन गर्म लिया जाय तो 95% हितकर होगा ,स्वाद और सेहत दोनों बनेगी ,अतः शाकाहार अपनावो और नशा का परित्याग करो तभी कुदरत के अनमोल उपहार जीवन की सार्थकता समझ में आएगी ,|
जियो ज़िन्दगी जी भर के .......
लेखक ;-अनुभवी .... रविकांत यादव ...m.com .2010