शनिवार, 10 अप्रैल 2010

प्रशंसा










आज २४ अप्रैल है ,भारतीय हीरो सचिन तेंदुलकर का जन्म दिन है ,वे ३८ साल के हो जायेगे ,इंडिया टी.वि । किसी काम तो आया ,२० साल के खेल में सचिन के पास सब कुछ है ,वही आत्म विस्वास ,नियंत्रण ,छोटा कद ,गुन्घ्राले बाल ,और वही तेज़ दौड़ ,लेकिन पहले की अपेक्षा खेल में कभी कही फूट वर्क की कमी महसूस होती है , लेकिन आश्चर्य धोनी स्ट्रा इक देते तो २०० रन भी कम पड़ते ,
उन्हें चोट नहीं लगानी चाहिए ,उन्हें दुःख दर्द न हो ,वे ४५ के उम्र तक खेल सकते है ,सौरव से उम्मीद थी की वे अपना सन्यास जोरदार विस्फोटक पारी से करे लेकिन निरासा हुई ,वे खेल सकते थे ,
सचिन वर्ल्ड कप जिताना चाहते है ,भारतीय खिलाडियों को उनका साथ देना होगा ,सतर्क रहना होगा ,चौतरफा ध्यान देना होगा ,भर पाई ऐसे ही होती है ,डरना नहीं होगा ,दबाब में बल्ला न थामना ,फुर्तीला होना होगा ,अपने ऊपर बिस्वास करना होगा , jokhim में अपना विकेट बचा कर रखना होगा ,उछालती गेंद चालाकी से खेलना होगा ,अपने गुण को दिखाना होगा ,जो लिखा हु वो न बनो जो हो वो बनो ,बाल को ताकत से दिशा देखकर और दिसा में भेजना होगा ,और हवा के शाट देखकर या नहीं खेलना होगा ,बोल्लर विपक्षी को एक एक रन को तरसा दो ,चौका गया कोई बात नहीं ,ये बाल अगली बार बल्ले बाज़ छु भी नहीं पायेगा ,विश्व कप हमारा होगा ,याद रहे ब्रम्हांड में चतुरता ,चपलता ,ताकत ,सहन शक्ति ,साहस , को सामान को छोड़ कर कोई नहीं हरा सकता ,
जी तोड़ परिश्रम ,प्रयास ,से श्री गणेश और माँ सरस्वती का आशीर्वाद बना रहता है ,
कर्म ,धर्म ,यादे ,साथी ,भटकतो के लिए चार पंक्तिया
धीरे धीरे पल, दिन ,महीने,गुजर जाते है ,
कोई राह बनाता है ,तो कई थक कर ,चल ,कर मंजिल पहुच जाते है ,
मिट ता कुछ नहीं ,पर बनाने वाले ही मिट जाते है ,
vaah रे प्यार राह से ,ये राह भी अजब है,उस पर चलने वाले भी बढ़ते ही चले जाते है ,
आइये जानते है आराध्य देव श्री गणेश को ,
श्री गणेश जो बुद्धि के देवता है ,वे खुसी और प्रसंशा में बसते है आप के साथ रहते है ,उनका कार्य अपने सूड़ की तरह सभी देवतावो व उन्हें प्रोत्साहित कर शक्ति बढ़ाना और प्रोत्साहित कर उनकी शक्ति में निखर लाना होता है ,वे एक सच्चे प्रसंसक है ,जो अच्छाई की जम कर तारीफ करते है ,ताकि वे अच्छाई का साथ न छोड़े ,वे सभी देवतावो के कार्य गुण की तारीफ़ ,सम्मुख करते है ,तथा उनके भक्तो को मिलाते है ,अपने भक्तो को राह दिखाते है ,सभी देवतावो के आशीर्वाद ,सफलता, स्वरुप आशीर्वाद के रस्ते को प्रसस्त करते है ,
तथा खुसी को नजर न लगे इसलिए विघ्न विनासक भी है ,
सभी देवतावो को प्रोत्शाहन उर्जा प्रदान करते है ,इसलिए सभी देवता के रूप में गढ़ है ,
एक बार वे श्री कृष्ण से भी मिलते है ,मिलते ही गुण गान ,प्रसंसा ,अपने ल य में थे ,श्री गणेश श्री कृष्ण की तरफ देखते है उनके मन चेरे पर कोई कोई भाव या खुसी नहीं थी ,कोई उर्जा का संचार नहीं कर पा रहे थे ,
श्री गणेश कहते है ,प्रभु मै ने यह बहुत कम ही देखा है ,लगता है सभी देव्तावो के आशीर्वाद लेने के पश्चात आप का नहीं मिल पायेगा ,श्री कृष्ण भाव विभोर हो जाते है ,
कहते है मुझे कुछ नहीं आप की मित्रता चाहिए ,
अब श्री गणेश भाव भिह्वल हो जाते है कृष्ण ,श्री गणेश से कहते है ,आप बहुत खूबसूरत है और अपनी प्रिय मोर पंखी श्री गणेश के माथे पर अलंकृत कर देते है ,
इस तरह श्री गणेश श्री कृष्ण के प्रसंसक ही नहीं मित्र भी बन जाते है ,मित्रता से दोनों एक दुसरे के प्रसंसक बन जाते है ,
तो आज इश्वर ने हमें एक और नया दिन दिया उसका धन्यवाद करे नायको की सच्ची प्रसंसा करे और सच्चे मित्र तलासे ,
कर्म ,मधुरता,और आशीर्वाद के लिए
बजी जो बंसी स्वरों ने सलाम किया ,
होठो को रोका पर सांसो ने नाम लिया ,
अजब दिया भी ऐसा की कुछ भी न लिया ,
कोई बता दे ये ,प्यार है या प्रतिभा लगे सारा जहाँ पा लिया ,
वैसे प्रसंसा वह एक औसधी है ,जो समय के साथ चलते रहने पर विष बन जाती है ,
दोस्तों चिपके रहो मेरे ब्लॉग से,
हो सके कुछ मिल जाये आप के भाग से ,,
इंडियन ........म.गा.का.वि.पि। २०१० एक खोया व्यक्ति ..................म.कॉम.2010

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