Thursday, May 27, 2010

उड़ते सपने -टूटते लोग भाग - 1














































अभी -अभी हाल ही शनिवार २२ मई २०१० में एयर इंडिया का विमान लैंडिंग के वक्त दुर्घटना ग्रस्त हो गया ,१५८ मारे गए कुछ रिश्ते वाले, कुछ पैसे वाले ,और कुछ परिश्रम करने वाले ,प्रशासन से ,लैंडिंग रन वे के आगे स्विमिंग पूल नहीं बना सकते तो ,लैंडिंग रन वे एवेरेस्ट ,अरावली ,और अन्य पहाडियों पर बना लो और उसमे मंत्री महोदय को बैठा दो और ओवर शूट -ओवर शूट का हल्ला मचा दो ,




सरकारी मतलब घर की तरकारी ,हर उड़ान पर ट्राइल ,चेक्किंग ,तो होगी नहीं ,सरकारी मतलब आराम के साथ काम ,निजी मतलब यहाँ काम घर पर आराम ,




अब क्या करे सारे सिस्टम में ही जंग लग चूका है ,हमारे पडोसी देश चाइना को ही ले ओल्य्म्पिक को पीछे छोड़ते हुए ,कहा से कहा पहुच रहा है ,हम वही है और रहना भी चाहते है ,क्यों की जो पुराने से चिपका रहेगा नया नहीं सोचेगा और पसंद भी नहीं करेगा ,जब तक वो फिर पुराना न हो जाये ,




हमारा देश गरीबो का देश कहा जाये तो कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी ,हमारे देश के निर्माता जवान ,किशन और शिक्षक है ,इसलिए जय जवान ,जय किशान और जय ज्ञान दान ,स्वयं शिखो ,ज़रूरत को शिखावो जो कुछ ज्ञान है ,दे दो ,




अभी अभी सर्वर की वजह से मेहनत पर पानी फिर गया ,


इसलिए कह गए कई महान पढो ,पधावो ,बाटो ,ज्ञान पावो सुख सम्ब्रीदी और सम्मान ,


जहा दिन सुरु होने पर रात का खाना और रात में दिन के खाने के लिए सोचना पड़ता है ,


तो क्या एक बच्चा पढने क्यों और किसलिए जायेगा ,तो उसे लालच दो ,ख़राब खाना दे कर सेहत मत बिगाड़ो ,उन्हें पैसा दो ,प्रवेश हेतु पिता से ओटल कार्ड लो ,


जहा खाने को नहीं अटता वह क्रायोजेनिक के चक्कर में १८ साल की MEHNAT AUR अरबो रूपी बर्बाद या पैसा गटक कर प्रयोग ही विफल बता दिया गया है ,इसे औसत के आधार पर बार -बार खिलौना बना कर प्रयोग क्यों नहीं किया गया ,क्या मॉडल ,डिजाईन ,सही था ,भगवान् जाने एक छलांग के चक्कर में ज्यादा मरना होता है ,जोखिम जो है ,जोखिम कम ही सही है ,क्यों की अधिक जोकिम सही नहीं ,होती ,


इन नकारा वैज्ञानिको को निकालो ,देश भक्त लावो ,


इसरो सिर्फ धन के लिए रो जहा भुकमरी है ,


हर विभाग का पैसा विभाग के लोगो और विभाग के देखभाल से ही नहीं पूरा होता ,उन्नति क्या खाक होगी ,


जलनिगम ,रोड को रोड वाले नगर निगम को ,नगर निगम वाले दूरसंचार को ,दूसंचार वाले ,जल निगम को ,जल निगम वाले ,विधुत्कीय को विध्हुत वाले वन व्हिभाग को वन भिव्हाग वाले रोड और विद्धुत विभाग को ही दोष देगे ,


टीम का मतलब ही होता है ,एक गलती एक बहार ,टीम में गलती और गलत आदमी के लिए जगह नहीं होती ,


कुछ नियोजित होता है ,कुछ ,सुनियोजित ,हर विभाग अपने कार्य का इन्सुरांस क्यों नहीं करा लेता ,


और दोष के लिए कोई नहीं मिला तो भगवन को भी दोष देने में सान होती है ,


रही बात हर विभाग के संगतःन के नए लोगो की तो कुछ २-३ साल में मोटा जाते है ,चर्बी जम जाती है ,


हबोकना सुरु ,देखा देखि साफ़ पाक लोग भी लिप्त हो जाते है ,


मान के पेशे में भी हबोकना सुरु हो जाते है ,मेरे क्लिनिक आ नहीं तो मर ,


मेरे कोअचिंग आ नहीं तो तू इशी क्लास में रह ,


मानो भूत का डर दिखा रहे हो ,अरे ये है वो है , आदि


एक माने जाने हॉस्पिटल में किडनी देने वाला और लेने वाला मर जाते है , क्यों


पोलिसे वाले केवल पैसे की भासा समझते है ,पैसा लेकर वाहन आगे जा कर किस्सी की जान भी ले सकता है ,एक बार एक पूल ही दह गया ,


गरीब ,लाचार को ऐसे दान्तेगेजैसे खौराह्वा कुत्ता हो ,


प्रधान मंत्री के यहाँ से चला धन ,ग्राम प्रधान तक आते आते १००-से ३३% ही बच जाता है कमाल की बात है उतने में ही रोड टका टक बन कर तैयार भी हो जाता है ,


किसी के पास खाने को नहीं ,किसी के पास पढने को नहीं ,किसी के पास इलाज़ को पैसा नहीं ,पैसा वाले है तो किस्मत कहा ले जाये पता नहीं ,क्यों की कभी कभी लाख कोसिस बाद भी लहरे और हवाए किस्ती को दूर GANTABYA SE DOOR KHICH ले जाती है ,


पता नहीं राजा बेटा पढ़ेगा जा पैसे से मस्ती लेगा ,या घर को ही छोड़ कर कही बस जायेगा ,


इस देश में आयकर विभाग से लेकर सी .बी। आई । तक बिकने के मौके भुनाने को नहीं जाने देती ,


जनगणना तो हो रहीC है किस घर में एक टाइम चुल्ल्हे नहीं जलते ये गिनती नहीं होगी ,


मुस्लिम धर्म में भी आमिर है तो खूब है गरीब है तो हद है ,सायद इसलिए भटक जाते है ,आज संगीत गायकी में ८०% इनकी आवाज़ भाती है मै मर जा उगा पर अपने वालो को बचा लूगा यही इस्लाम धर्म है ,इसमें अलग और सर्वोपरी केवल मासाहार त्यागने वाले ही अलग धर्म बना सकते है ,मार पीट हमारी परंपरा नहीं है ,अँगरेज़ लाये थे छोड़ गए अब डब्लू डब्लू ऍफ़ या ई से शिखा रहे है ,


यहाँ शेर मेमने से विपरीत जल धरा के बाद भी पूचता है ,तुने मेरा पानी क्यों जूठा किया ,


अब इस का उपाय आप ही बतावो , हां अलग अलग जबाब मिलेगे


संसद में कुछ लोग फिल्म देखने से ज्यादा रील बदलने का इंतज़ार करते है ,


ये नेता लोग तो अफीम और धतूरे के फूल है ,


हमारे देश में आज भी आनाज के खेतो से आनाज काटने के बाद कुछ लोग आनाज उठाने को झाड़ू लेकर पहुच जाते है ,मै सोचता था आज के लिए शिक्षा ,चिकित्चा ,और रोज़गार आवअसक है ,ज़रूर मिले ,पर जहा रोटी कपड़ा और मकान के ही लाले है ,तो ये कहा तक संभव है ,जब चूल्हा चौका बर्तन ही न हो तो खाना कैसे बने ,ठीक यही हाल गरीबी और गरीबो में बिजली और बिजली की स्तिथि है ,भिखारियों को सचल पसु बंदी की तरह पकड़ो और मोमबत्ती के कारखाने में भेज दो ,......अब गूगल पर नहीं लिखुगा इसी नाम से ट्विटर पर हु ........मेरा पुराना अकाउंट चोरी हो चूका है , सब कुछ ट्विट्टर पर ब्लॉग से ......ज़िन्दगी रही तो मिलते रहेगे .......क्रमशः ................

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