शुक्रवार, 12 फ़रवरी 2010

हारा ........




आज हर कोई कही न कही परेसान मिल जायेगा ,कोई के लिए बड़ी परेशानी है तो कोई थोडा बहुत परेसान है , आज के इस कलयुग में अच्छे लोग कम और बुरे लोग ज्यादा है ,अतः भावना में कोई निर्णय सोच कर ले ,विष सर्प का स्वाभाव होता है ,अतः संपर्क में भी सावधान रहे ,यहाँ दो पंक्तिया हारे को

तन्हाई की तलाश में समंदर की आगोश में गया,

किसी ने कहा पागल तो किसी ने कहा होश में गया ,

समंदर ने माँगा साथी जो कही रह गया ,

सजा दिया यही जहा से चला वही आ कर रह गया ,

दुनिया ही दिखाती ,सिखाती ,और ढालती है ,कोई एडिसन ,आइन्स्टीन ,गाँधी, सिकंदर, बावला आर्कमिडीस ,और दयासागर गौतम बुद्ध नहीं होता है , यही दुनिया उसे बना देती है ,इसलिए दुनिया बहुत सुन्दर है ,जीवन से सिकायत करने वाले ठीक ऊपर लिखे सायरी की तरह समंदर में फेके हलके वस्तु की तरह स्वयं वही आ जाते है , जहा से चलते है ,यानि सब व्यर्थ इसलिए पिचड़े नहीं ,सामना करो और विकशित बनो , नहीं कुछ तो दर्शक होने में क्या हर्ज़ है ,अब यहाँ ब्रह्माण्ड शिक्षक की वो बात तुम्हारा क्या गया , क्या लाये थे , क्या लेजयोगे,जो लिया यही से लिया ,कर्म करो , आदि आदि पढो .................

हा याद रहे पाप की सुरुवात ही मद होकर चरमता है , एक चिंगारी सब कुछ नास कर देती है ,इसलिए हिन्दू हाथो में रक्षा सूत्र बांधते है ,ताकि बुरे कार्य पर प्रथम नज़र पड़े और उसमे लिप्तता न हो और तिलक लगाते है ,की कोई राह दिखाए जिससे अनजान है ,अतः बुरे की,पाप की पहचान प्रारंभ में हो जाये तो सबसे उपुक्कत है ,स्वयं ज्ञान हो या पाप से बचने के लिए सरन ली जाये दो तरीका है , भगवान की पूजा पाप ,व बुरे कार्य से बचने के उद्द्येश्य से हो तो वो सर्वोत्तम होती है ,

पुरुष पुरुसोत्तम हो सकता है , परमात्मा नहीं ,यही हमारा प्रयाश हो ,या होना चाहिए ,इसका बोध उस वक्त कराया जाता है , सब बोलते है एक निसब्द शांत सुनता है ,

समय प्रमुख पांच देवो से भी बड़े देव है ,ब्रहमांड में सर्वोपरि है ,

कलयुग अभिमानु पुत्र परिच्छित , से बता कर मानव के जीवन को छोड़कर जीने पर उन्हें घेर लेता है , जैसे अहंकार ये भी तो मदिरा सामान है , चरित्र हीनता , क्रोध, से हिंसा , बिना परिश्रम के धन ,इनके शाखावो को खोजो वर्गों में रखो , हिंसा में आनंद , आदि आदि , कलियुग जो पेंडिंग थे , या था अपने स्तर पर सिपाही बनायेगे ,ये कलयुग परजीवी जैसे है ,हिंशा ,धन, चर्रित्र,नशा,आदि के घालमेल से अपना प्रकोप दिखायेगे ,और सजा भी देगे ,

विकल्प इस युग या समय के लिए जैन धर्म के सिद्धांत ,मन,के सत्य , धर्म, न्याय ,के तराजू ,से आपकी कमाई ,मरेगी नहीं ,दुःख नहीं होगा ,मैंने कहानी भक्ति और भावना के जरिये जो बात कहने की कोसिस की है , उसे पढ़े ,हिन्दू मानते है मानव जन्म ८४ लाख जन्मो बाद मिलता है ,पुण्य मिटने या कमजोर होने पर देवता भी मानव जन्म पाते है ,अतः आप भी देवता बन सकते है ,परन्तु देवता भी पूर्ण नहीं होते है ,

मानव प्रविती और मृत्यु सत्य के लिए ,दो सब्द .....


सभी चलते है ,मंजिल की तलाश के लिए ,

मंजिल से अनजान मंजिल की आश के लिए ,

मंजिल आयी भी तो सब कुछ नाश के लिए ,

जिस लिए चले व्यर्थ हो जाये सब एक मोह pass के लिए



दो सब्द सत्य और शक्ति के लिए ..........

समय के चार पहर सभी के पहरेदार हो गए ,

समय ने खेल दिखाया और फिर वही चार पहर सभी के हजिरदार हो गए
म.कॉम.२००९-१०



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